दिग्गज शायर-कवि पद्मश्री गुलजार देहलवी का निधन, 5 दिन पहले कोरोना से जंग जीत लौटे थे घर
नई दिल्ली। कोरोना वायरस को हराकर घर लौटने के 5 दिन बाद जानेमाने शायर व कवि रहे साहित्यकार पद्मश्री एएम जुत्शी उर्फ गुलजार देहलवी का शुक्रवार को निधन हो गया। उनकी उम्र 93 साल थी और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत पर उन्हें नोएडा के कैलाश अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गुलजार का निधन शुक्रवार को करीब 2:30 बजे हुआ। आपको बता दें कि ग्रेटर नोएडा के शारदा अस्पताल में कोरोना का इलाज कराकर ठीक होने के बाद वो पांच दिन पहले घर लौटे थे।

इस दौरान अस्पताल से जाते समय भावुक होते हुए मेडिकल स्टाफ से उन्होंने कहा था कि आप लोगों ने नई जिंदगी दी है। पूरी तरह ठीक होने पर सभी को अपने घर खाने पर बुलाएंगे। उनके बेटे अनूप जुत्शी ने कहा, 'सात जून को उनकी कोरोनावायरस की जांच रिपोर्ट दोबारा निगेटिव आयी जिसके बाद हम उन्हें घर वापस लाये। शुक्रवार दोपहर लगभग ढाई बजे हमने खाना खाया और उसके बाद उनका निधन हो गया।'
उन्होंने कहा, 'वह काफी बूढ़े थे और संक्रमण के कारण काफी कमजोर भी हो गए थे। डॉक्टरों का मानना है कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा होगा।' आपको बता दें कि गुलजार देहलवी का असली नाम आनंद मोहन जुत्शी है। उनका जन्म 7 जुलाई 1926 को दिल्ली में हुआ था। गुलजार देहलवी का सम्बन्ध कश्मीर से है लेकिन वे दिल्ली में ही रहे। देहलवी को भारत सरकार ने पद्मश्री से भी सम्मानित किया था। 2009 में उन्हें मीर तकी मीर पुरस्कार भी दिया गया था। 2011 में उनकी रचना कुलियात-ए-गुल्जार प्रकाशित हुई थी। देहलवी भारत सरकार द्वारा 1975 में प्रकाशित पहली उर्दू विज्ञान पत्रिका 'साइंस की दुनिया' के संपादक भी रह चुके हैं।












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