वीर बाल दिवस: 'इतिहास के नाम पर गढ़े हुए नरेटिव पढ़ाते रहे, ताकि...' औरंगजेब की बर्बरता पर क्या बोले पीएम?

राजधानी दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में सोमवार को 'वीर बाल दिवस' के अवसर पर एक खास कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे। ये कार्यक्रम गुरु गोविंद सिंह, उनके चार बेटों (साहिबजादे) और माता गुजरी जी की याद में आयोजित किया गया था। इस दौरान लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि औरंगजेब के आतंक के खिलाफ, भारत को बदलने की उसकी योजनाओं के खिलाफ, गुरु गोविंद सिंह जी पहाड़ की तरह खड़े थे।
पीएम मोदी के मुताबिक शहीदी सप्ताह और वीर बाल दिवस हमारी सिख परंपरा के लिए भावों से भरा जरूर है लेकिन इससे आकाश जैसी अनंत प्रेरणा जुड़ी हैं। वीर बाल दिवस हमें याद दिलाएगा कि शौर्य की पराकाष्ठा के समय आयु मायने नहीं रखती। यह याद दिलाएगा कि दस गुरुओं का योगदान क्या है। ये अतीत हजारों वर्ष पुराना नहीं है। ये सब कुछ इसी देश की मिट्टी पर केवल 3 सदी पहले हुआ। एक ओर धार्मिक कट्टरता और उस कट्टरता में अंधी मुगल सल्तनत और एक ओर ज्ञान और तपस्या में तपे हुए हमारे गुरु, भारत के प्राचीन मानवीय मूल्यों को जीनें वाली परंपरा। एक ओर मजहबी उन्माद और दूसरी ओर सब में ईश्वर देखने वाली उदारता। इस सबके बीच एक ओर लाखों की फौज और दूसरी ओर अकेले होकर भी निडर वीर साहिबजादे। ये साहिबजादे किसी से डरे और झुके नहीं थे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें इतिहास के नाम पर वह गढ़े हुए नरेटिव बताए और पढ़ाए जाते रहे जिससे हमारे अंदर हीन भावना पैदा हो, लेकिन हमारी परंपराओं ने इन गौरव गाथाओं को जीवित रखा। अगर हमें भारत को भविष्य में सफलता के शिखरों तक लेकर जाना है तो हमें अतीत के संकुचित नजरियों से भी आजाद होना होगा। औरंगजेब के आतंक की खिलाफ भारत को बदलने के उसके मंसूबों के खिलाफ गुरु गोविंद सिंह जी पहाड़ की तरह खड़े थे, लेकिन जोरावर और फतेह सिंह साहब जैसे कम उम्र के बालकों से औरंगजेब की क्या दुश्मनी हो सकती थी? दो निर्दोष बालकों को दीवार में जिंदा चुनवाने जैसी दरिंदगी क्यों की गई? वह इसलिए की गई क्योंकि औरंगजेब और उसके लोग गुरु गोविंद सिंह के बच्चों का धर्म तलवार के दम पर बदलना चाहते थे।












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