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VB G RAM G: मनरेगा खत्म, नया रोजगार कानून लागू, राष्ट्रपति की मंजूरी से VB G RAM G एक्ट, अब क्या-क्या बदलेगा?

VB G RAM G Law: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' यानी VB-G RAM G विधेयक, 2025 को मंजूरी दे दी है। अब 'वीबी जी राम जी' कानून बन गया है। इसके साथ ही देश का सबसे चर्चित ग्रामीण रोजगार कानून मनरेगा (MGNREGA) अब औपचारिक रूप से खत्म हो गया है।

सरकार का दावा है कि नया कानून ग्रामीण रोजगार को ज्यादा मजबूत, टिकाऊ और भविष्य की जरूरतों के मुताबिक बनाएगा। वहीं विपक्ष इसे गरीबों के अधिकारों पर चोट बता रहा है। आखिर इस नए कानून में क्या है खास और इससे गांवों की तस्वीर कैसे बदलेगी, आइए विस्तार से समझते हैं।

VB-G RAM G Law

🟡 What is VB G Ram G Bill: वीबी जी राम जी क्या है, आसान भाषा में समझिए

वीबी जी राम जी बिल एक नया ग्रामीण रोजगार कानून है, जिसे सरकार ने पुराने मनरेगा (MGNREGA) की जगह लेकर आई है। मनरेगा को यूपीए सरकार के दौर में लागू किया गया था, जिसके तहत ग्रामीण परिवारों को हर साल कम से कम 100 दिन का रोजगार देने की कानूनी गारंटी थी। राज्यों को यह छूट भी थी कि वे चाहें तो 100 दिनों से ज्यादा, यानी 50 दिन अतिरिक्त काम भी दे सकते हैं।

एनडीए सरकार के समय में यह व्यवस्था और बढ़ाई गई थी। खासकर जंगलों में रहने वाले अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों के लिए मजदूरी वाला काम 150 दिन तक बढ़ाया गया था।

अब नए वीबी जी राम जी कानून के तहत सरकार ने साफ किया है कि ग्रामीण परिवारों को 125 दिन के रोजगार की वैधानिक गारंटी मिलेगी। यानी यह अब कानूनन तय होगा कि इतने दिन काम दिया ही जाएगा।

🟡 मनरेगा की जगह क्यों लाया गया VB G Ram G कानून (Why Replacing MGNREGA)

🔹 मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिन का रोजगार देने की कानूनी गारंटी थी। सरकार का कहना है कि व्यवहार में यह सीमा अक्सर अधिकतम सीमा बन गई, जबकि इसे न्यूनतम गारंटी होना चाहिए था। VB-G RAM G कानून के जरिए सरकार रोजगार की अवधि बढ़ाकर इसे ज्यादा प्रभावी बनाने का दावा कर रही है। साथ ही इसे 'विकसित भारत 2047' के विजन से जोड़कर देखा जा रहा है।

🔹 केंद्र सरकार का कहना है कि इस बिल का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी पैसा सही जगह और सही तरीके से खर्च हो। इसके साथ ही व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जाएगी, ताकि फर्जी काम, अधूरी योजनाएं और गलत भुगतान जैसी शिकायतें कम हों।

🔹 केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक, यह नया कानून गांवों के समग्र विकास की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य हर गरीब को पर्याप्त रोजगार देना, उसकी इज्जत के साथ आजीविका सुनिश्चित करना और खासतौर पर दिव्यांगों, बुजुर्गों, महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को अतिरिक्त सुरक्षा देना है।

🔹 सरकार ने इस योजना के लिए 95,000 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। अधिकारियों का कहना है कि पहले कई राज्य सामग्री लागत पर खर्च करने से बचते थे और केंद्र से ज्यादा से ज्यादा पैसा लेने की कोशिश करते थे। नए कानून से इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है।

🟡 अब मिलेंगे 125 दिन का काम

नए कानून का सबसे बड़ा बदलाव रोजगार की अवधि से जुड़ा है। अब ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिन का रोजगार देने की कानूनी गारंटी होगी। सरकार का तर्क है कि इससे ग्रामीण आय बढ़ेगी और अस्थायी बेरोजगारी की समस्या कम होगी। इसे मनरेगा की तुलना में बड़ा विस्तार बताया जा रहा है।

🟡 फंडिंग में बड़ा बदलाव, राज्यों की बढ़ेगी जिम्मेदारी

VB-G RAM G एक्ट में फंडिंग ढांचे को भी पूरी तरह बदला गया है। मनरेगा में मजदूरी का खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी, लेकिन अब केंद्र और राज्य मिलकर खर्च उठाएंगे। नया फार्मूला 60:40 का होगा। यानी 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य सरकारें देंगी। सरकार का कहना है कि इससे सहकारी संघवाद मजबूत होगा और राज्यों की भागीदारी बढ़ेगी। हालांकि कई राज्य इसे वित्तीय बोझ बढ़ने के तौर पर देख रहे हैं।

🟡 खेती के मौसम में काम पर ब्रेक

इस कानून के तहत एक और अहम प्रावधान जोड़ा गया है। अब बुवाई और कटाई के पीक सीजन में 60 दिन तक रोजगार रोका जा सकेगा। सरकार का तर्क है कि इससे खेतों में मजदूरों की कमी नहीं होगी और किसानों को राहत मिलेगी। आलोचकों का कहना है कि इससे मजदूरों की आय पर असर पड़ सकता है।

🟡 काम के दायरे में कटौती

VB-G RAM G के तहत काम के दायरे को चार प्रमुख क्षेत्रों तक सीमित किया गया है। इनमें जल सुरक्षा, बुनियादी ग्रामीण ढांचा, आजीविका से जुड़े संसाधन और जलवायु अनुकूलन शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इससे बनने वाली संपत्तियां ज्यादा टिकाऊ और उपयोगी होंगी।

🟡 VB G RAM G की खासियत

VB G RAM G बिल की एक बड़ी खासियत यह है कि अब ग्राम पंचायत और ग्राम सभा को ज्यादा अधिकार दिए जाएंगे। वे खुद तय करेंगी कि गांव में कौन से काम जरूरी हैं। इसका मकसद यह है कि सिर्फ कागजों पर काम दिखाने या भुगतान लेने के लिए योजनाएं न बनें, बल्कि वास्तविक जरूरतों के हिसाब से काम हो। कुल मिलाकर, सरकार इस कानून को ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को ज्यादा असरदार, जवाबदेह और विकासोन्मुखी बनाने की कोशिश के तौर पर पेश कर रही है।

🟡 विपक्ष का तीखा विरोध

कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इस कानून पर कड़ा ऐतराज जताया है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने महात्मा गांधी का नाम हटाने पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि नया कानून अधिकार आधारित व्यवस्था को कमजोर करता है, फैसले केंद्र के हाथ में समेटता है और मजदूरों की सुरक्षा घटाता है।

राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ VB-G RAM G एक्ट अब कानून बन चुका है। आने वाले महीनों में इसके नियम और जमीनी क्रियान्वयन पर सबकी नजर रहेगी। सवाल यही है कि क्या यह कानून सच में ग्रामीण भारत को मजबूत करेगा या मनरेगा के दौर की सुरक्षा को कमजोर कर देगा। इसका जवाब समय और जमीन पर दिखने वाले असर से ही मिलेगा।

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