Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Varsha Varma: कोरोना से मिले जख्मों पर मरहम लगा रही लखनऊ की ये बेटी, करवा रहीं संक्रमित शवों का दाह संस्कार

लखनऊ, अप्रैल 21: कोरोना महामारी में अपने ही अपनों के काम नहीं आ रहे। कोरोना से जिनकी मौत हो रही उनके शव को चार कंधे भी नसीब हो रहे। वहीं उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बेटी ऐसी भी है जो अपनी जान जोखिम में डाल कर इंसानियत की नई मिसाल पेश कर रही हैं । जिन कोरोना संक्रमित लाशों को उनके अपने छोड़ कर चले जाते हैं या हाथ तक नहीं लगाते उन लावारिश शवों का ये बेटी दाह संस्‍कार करवा रही हैं और संक्रमित लाशों के लिए फ्री वाहन चलवा रही हैं। ये नेक काम करने वाली बेटी कोरोना योद्धा वर्षा वर्मा हैं। वन इंडिया हिंदी ने वर्षा वर्मा से विशेष बातचीत की।

कोरोना काल में इंसानियत की मिसाल बनीं वर्षा वर्मा

कोरोना काल में इंसानियत की मिसाल बनीं वर्षा वर्मा

वर्षा ने जब सुना और देखा कि कोरोना के भय से बहुत से परिवार अपने परिजनों की लाशें छोड़कर चले जा रहे है उनका अंतिम संस्‍कार नहीं हो पा रहा था। वहीं कई ऐसे मजबूर लोग हैं जिनके घरों में लाश पड़ी है लेकिन उसको उठाने वाला नहीं हैं। कई गरीब परिवारों को शव ले जाने के लिए शव गाड़ी नहीं मिल रही थी। ये सब भयावह तस्‍वीर देखकर वर्षा का मन कचोट गया और उन्‍होंने अपनी सेविंग लगाकर लोगों की मदद करने की ठानी।

वर्षा वर्मा ने की 'एक कोशिश ऐसी भी'

वर्षा वर्मा ने की 'एक कोशिश ऐसी भी'

वर्षा वर्मा की 'एक कोशिश ऐसी भी' नाम की संस्था भी है। पूर्व जूडो चैंपियन वर्षा वर्मा ने बताया मेरी एक खास दोस्‍त का लखनऊ के राममनोहर लोहिया अस्‍तपाल में कोरोना के चलते निधन हो गया था। उसके शव को श्‍मशान घाट ले जाने के लिए मैंने चार घंटे तक गाड़ी ढूढ़ी लेकिन नहीं मिली और बाद में साढ़े पांच हजार रुपए की मोटी रकम खर्च करने के बाद गाड़ी का इंतजाम हो पाया। वर्षा ने कहा तभी मुझे लगा कि जब सुविधा संपन्‍न लोगों को इतनी परेशानी हो रही तो गरीबों का क्या!

वर्षा शवों को करवा रही अंतिम संस्कार, एक कॉल पर हो जाती हैं हाजिर

वर्षा शवों को करवा रही अंतिम संस्कार, एक कॉल पर हो जाती हैं हाजिर

इसके बाद वर्षा ने एक किराए की गाड़ी हायर की और उसकी सीटे हटाकर ऐंबुलेंस जैसी बनाकर शव वाहन बना दिया। जिस पर वो अब हर दिन लगभग 8 से 10 शव ढो रही हैं। लोगों को इसकी जानकारी मिले इसके लिए वो पहले दिन राम मनोहर लोहिया अस्‍पताल के सामने कोरोना शवों के लिए निशुल्‍क गाड़ी की सुविधा वाली तख्‍ती लेकर खड़ी हो गई और गाड़ी पर निशुल्क शव वाहन लिखवाया। इसमें अपना संपर्क नंबर भी लिखा। उन्‍होंने बताया कि कुछ ही घंटे में मेरे फोन की घंटी बजने लगी और मैंने संक्रमित शवों को श्मशान और कब्रिस्‍तान ले जाने का काम शुरू कर दिया।

पीपीई किट नहीं होती तो भी नहीं मानती हार

पीपीई किट नहीं होती तो भी नहीं मानती हार

वर्षा वर्मा ने बताया हर दिन सुबह साढ़े नौ बजे वो अपने ड्राइवर के साथ गाड़ी लेकर निकल पड़ती हैं और लाशों को गाड़ी पर खुद रखकर उसका दाह संस्‍कार करवाने का प्रबंध करती हैं। दिन भर पीपीटी किट पहन कर काम करती हूं लेकिन कई बार जब किट खत्‍म हो जाती है तो ऐसे ही काम करना पड़ता है। कई बार परिजन शव को उठाने में हाथ तक नहीं लगाते या पीपीई किट पहनकर शव के पास आते हैं। कई परिजनों के पास पीपीटी किट नहीं होती तो हमें ही शव का दाह संस्कार करवाना पड़ता है। हर दिन 5 से 10 ऐसे ही शवों का वर्षा वर्मा दाह संस्‍कार करवा रही हैं।

लोगों के इस व्‍यवहार से आहत हुई वर्षा

लोगों के इस व्‍यवहार से आहत हुई वर्षा

वर्षा ने कहा कोरोना महामारी में ये आलम है कि लोग मेरे द्वारा शुरू की निशुल्‍क सेवा का गलत उपयोग भी कर रहे है। वर्षा बताती हैं सोमवार को फोन आया कि कृष्णा नगर में किराए के घर में रह रही एक महिला की मौत हो गई है उसका कोई अपना नहीं है जब मैं वहां पहुंची तो देखा उनके रिश्‍तेदार जो मंहगी लग्‍जरी गाड़ी से आए थे वो दूर खड़े थे और डेडबॉडी को हाथ तक नहीं लगाया था। सच्‍चाई पता चलने के बाद भी मैं उस शव को श्मशान तक लेकर आईं और तब रिश्तेदारों ने अंतिम संस्‍कार किया।

वर्षा ने बयां किया ये दर्द
वर्षा ने बताया लखनऊ की एक पॉश कालोनी में एक व्‍यक्ति की मौत हो गई और जब मैं पहुंची तो शव के पास पत्‍नी थी। वो डेड बॉडी लगभग 90 किलो की रही होगी। डेड बॉडी को पैक करने में दो बार पैकेट फटा और उठाने में चादर फट गई लेकिन उसके रिश्‍तेदार बाहर खड़े होकर वीडियो बनाते रहे लेकिन पास मदद के लिए कोई भी नहीं आया। 90 किलो वजन के शव को अकेले पैक करके गाड़ी पर लाना बहुत मुश्किल था लेकिन हार नहीं मानी और किसी तरह अपने ड्राइवर की मदद से सफल हुई।

लखनऊ की पूर्व जूडो चैंपियन वर्षा वर्मा का परिवार

लखनऊ की पूर्व जूडो चैंपियन वर्षा वर्मा का परिवार

42 वर्षीय वर्षा वर्मा स्‍टेट लेवल जूडो चैंपियन हैं और एक लेखिका हैं। वर्षा की कविताओं के संग्रह की चार बुक भी प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्षा लड़कियों को सेल्‍फ डिफेंस की ट्रेनिंग देने के साथ सफल गृहणी पत्‍नी और मां भी हैं वर्षा वर्मा के पति राकेश वर्मा पीडब्‍लूडी में असिस्‍टेंट इंजीनियर हैं और वर्षा की एक प्‍यारी सी बेटी नंदिनी है जो दसवीं में पढ़ रही हैं। वर्षा बताती हैं उनके पति ने पहले उनकी फिक्र के कारण मना किया लेकिन बाद में मैंने उन्‍हें मना लिया। अब इस नेक काम में वर्षा के पति ओर बेटी उनका हर दिन मनोबल बढ़ा रहे हैं। क्या आपको इस काम करते हुए अपने और परिवार के लिए कोरेाना का खतरा महसूस नहीं होता इसके जवाब में वर्षा बोलीं मानव चोला मिला है तो ऐसे ही खा पीकर थोड़े ही मर जाना हैं, वो इंसान ही क्या जो इंसान के काम न आए।

आप भी इस नेक काम में वर्षा वर्मा की मदद करें

आप भी इस नेक काम में वर्षा वर्मा की मदद करें


वर्षा वर्मा ने बताया कि उन्‍होंने इस काम के लिए अब तक कोई सरकारी मदद नहीं ली अपने ही पैसे खर्च करके वो ये काम कर रही हैं। लेकिन पीपीटी किट, गाड़ी के ईधन का खर्च और ड्राइवर का वेतन सबकुछ मिलाकर लंबा खर्च हो रहा। वर्षा ने कहा मैं ऐसे लाचार लोगों की मदद के लिए एक और गाड़ी बढ़ाना चाहती हूं। जिसके लिए मदद मिले तो मेरा काम और आसान हो जाएगा। अगर आप भी वर्षा वर्मा की मदर करना चाहते हैं तो उनके नंबर +918318193805 पर संपर्क कर सकते हैं।

कोरोना से जंग में दम तोड़ते अस्पताल, Photos देख कांप जाएगी रूहhttps://hindi.oneindia.com/photos/hospitals-condition-worsens-due-to-coronavirus-oi61110.html
More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+