कैसे विपक्षी दलों और मोदी सरकार के बीच दूरियां मिटा रही हैं वंदे भारत ट्रेन?
संसद के मानसून सत्र में मणिपुर के मुद्दे पर मोदी सरकार और विपक्षी दलों के बीच आर-पार की नौबत आ चुकी है। लेकिन, स्वदेशी सेमी हाई-स्पीड वंदे भारत ट्रेन न सिर्फ देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ रही है बल्कि, विभिन्न दलों के नेताओं को भी एक पटरी पर ला रही है।
भारतीय रेलवे को वंदे भारत ट्रेन की सेवा के लिए लगभग 200 अनुरोध मिले हैं। रेल अधिकारियों के मुताबिक यह गुजारिशें केंद्रीय मंत्रियों, सत्ताधारी बीजेपी और विपक्षी दलों के तमाम सांसदों, विभिन्न मौजूदा और पूर्व मुख्यमंत्रियों और नेताओं की ओर से मिल रहे हैं, जो चाहते हैं कि उनके निर्वाचन क्षेत्र तक इस ट्रेन की सेवा पहुंचे।

बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रही है वंदे भारत ट्रेन
दरअसल, सेमी हाई-स्पीड और आरामदायक यात्रा के साथ-साथ अत्याधुनिक सुविधाओं की वजह से वंदे भारत ट्रेन बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रही है। राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों की तुलना में भी यह यात्रियों का ध्यान ज्यादा खींचने लगी हैं। अभी देश के 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक 50 वंदे भारत ट्रेनों की सेवाएं उपलब्ध हैं। जल्द ही 6 और वंदे भारत ट्रेनों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरी झंडी दिखाने वाले हैं।
सियासी दूरियां मिटा रही हैं वंदे भारत ट्रेन
अगर केंद्रीय मंत्रियों की बात की जाए तो प्रह्लाद जोशी, आरके सिंह, अनुप्रिया पटेल, राव इंद्रजीत सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया तक की ओर से इसके लिए रेल मंत्रालय से अनुरोध किया गया है। जहां तक विपक्ष के प्रमुख चेहरों की बात है तो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से लेकर केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन तक की ओर से अपने चुनाव क्षेत्रों के लिए वंदे भारत ट्रेन सेवा की मांग की गई है।
नई रूटों पर शुरू होगी वंदे भारत सेवा
रेल मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, 'सभी राज्यों से इस ट्रेन की भारी मांग है। पार्टी लाइन से ऊपर उठकर सांसदों और विधायकों ने इसके लिए अनुरोध भेजे हैं। किसी भी रूट पर इस ट्रेन की सेवा शुरू करने का फैसला एक समिति करती है, जो कई बातों को ध्यान में रखती है। जैसे-जैसे अधिक ट्रेनें चलाई जाएंगी, हम उन्हें नई रूटों पर शुरू करेंगे।' एक आंकड़े के मुताबिक इस ट्रेन की मांग करने वाले सांसदों में अधिकतर तो भाजपा के हैं, लेकिन विपक्षी दलों के लॉमेकर्स की भी लंबी कतार है।
विपक्षी दलों में सबसे ज्यादा कांग्रेस की ओर से हुआ अनुरोध
इसमें आम आदमी पार्टी, सीपीएम, एनसीपी, टीएमसी, जेडीयू और बीएसपी भी शामिल है। विपक्षी दलों में सबसे ज्यादा 16 मांगें कांग्रेस की ओर से आई हैं। वहीं शिवसेना से 10 और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी से 6 मांगें आई हुई हैं।
99.6% तक रहती है ऑक्यूपेंसी- रेल मंत्री
पिछले हफ्ते ही रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में बताया था कि इस ट्रेन की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लग सकता है कि इसकी ऑक्यूपेंसी 99.6% तक रहती है। इसकी वजह ये है कि दूसरी ट्रेनों से ज्यादा किराया होने के बावजूद यह ज्यादा आरामदायक और इससे यात्रा में दूसरी ट्रेनों के मुकाबले काफी कम समय लगता है। यह प्रमुख शहरों के बीच दिन के समय ही चलती है और यात्रा में लगने वाला औसत समय 6 घंटे 40 मिनट हैं।
जैसे नई दिल्ली से वाराणसी तक की 800 किलोमीटर की दूरी वंदे भारत एक्सप्रेस 8 घंटे में पूरी करती है। जबकि, यहां के लिए एसी चेयर कार का किराया करीब 1,800 रुपए है, जो कि हवाई जहाज के किराए से लगभग आधा है। वहीं इसकी अधिकतम स्पीड 160 किलोमीटर प्रति घंटे तय की गई है।












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