मुआवजे पर सरकारी मजाक, उत्तराखंड में मदद के नाम पर 150 रुपये के चेक बंटे
देहरादून। उत्तराखंड में तबाही को तीन महीने बीत चुके है। हजारों की मौत, करोड़ों की तबाही और कभी ना खत्म होने वाले दर्द के बाद सरकार ने मुआवजे का मरहम लगाने की कोशिश की। ताबाही के दर्द को कम करने के लिए उत्तराखंड सरकार ने लोगों के मुआवजे का चेक बांटने की घोषणा की। आपदा पीड़ितों की मदद के लिए प्रदेश की विजय बहुगुणा सरकार ने दावे तो बड़े बड़े किए, लेकिन असलियत इससे काफी अलग है।
सरकार ने मदद के लिए हाथ बढाया, लेकिन सरकार के हाथ इतने तंग निकले कि लोगों इसकी तारिफ करने के बजाए उनकी आलोचना करने लगे। बागेश्वर जिले के सैकड़ों पीड़ितों को यह मुआवजा मदद के नाम पर मजाक लग रहा है। राहत के नाम पर सरकार ने पीड़ितों को 150 रु. चेक बांटे। हलांकि जो आंकड़ा सरकार की ओर से दिया गया वो तो कुछ और ही बयां कर रहा है। सरकारी आंकड़ों के के मुताबिक बागेश्वर में अब तक 2 करोड़ 27 लाख 38 हजार 756 रुपये की राशि पीड़ितों में बांटी जा चुकी है।

जमीन की हकीकत इससे अलग हैं। बागेश्वर के गांव कंडा को सिर्फ 8,680 रुपये मिले हैं। सामान्यता इस गांव में लोगों को नुकसान के लिए सरकार की ओर से 150रु. के चेक मिला है। गांव के एक किसान त्रिलोक सिंह को सबसे ज्यादा 789 रुपये का चेक मुआवजे के तौर पर मिला है। अंग्रेजी अखबार मेल टुडे के मुताबिक गांव में सबसे ज्यादा 789 रु. और सबसे कम 150 रु. का चेक बांटा गया है। जबकि तबाही के बाद राज्य सरकार ने आपदा में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए 5 लाख और घर और खेत खो देने वालों के लिए 1 लाख रुपये की सहायता राशि घोषित की है।
15 और 16 जून को जब उत्तराखंड में तबाही आई थी तो सरकार मे लोगों की हर संभव सहायता करने का आश्वासन दिया था। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने हाल ही में कहा था कि 150 करोड़ की सहायता राशि चेक के जरिये बांटी जा रही है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी प्रदेश को हरसंभव मदद करने का भरोसा जताया था, लेकिन इन सब के बावजूद मदद के नाम पर मजाक किया जा रहा है।












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