श्मशान, लड़की की लाश और भोले बाबा...क्या है वो 24 साल पुराना मामला, जिसने सूरज पाल को पहुंचा दिया था जेल?

उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुए भीषण भगदड़ कांड ने नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा को सुर्खियों में ला दिया है। चरण राज लेने की होड़ में मची भगदड़ में 121 लोग कुचल कर मारे गए। इसके बाद से भोले बाबा के ऊपर कई तरह के आरोप लग रहे हैं।

भोले बाबा के नाम से मशहूर सूरजपाल का विवादों से गहरा नाता रहा है। बाबा जेल भी जा चुके हैं। स्वयंभू भोले बाबा लोगों की बीमारियों को ठीक करने का दावा करते हैं। बाबा के अनुयायियों का कहना है कि उनके दिए पानी से लोग रोग मुक्त होते हैं। इस चक्कर में बाबा को हवालात की सैर भी करनी पड़ी थी।

Narayan Sakar Hari Bhole Baba old case

बात आज से 24 साल पहले की है। आगरा का केदार नगर में बाबा ने एक लड़की की मौत के बाद जबरन उसकी लाश को श्मशान घाट में अपने कब्जे में ले रखा था। बाबा का दावा था कि वो इस लड़की को जीवित कर सकता है। सफेद चादर में लिपटी लड़की की लाश पर लाल कपड़ा रख कर बाबा मंत्र पढ़ रहा था और आसपास खड़े उसके भक्त हाथ जोड़े लड़की के जीवित होने का इंतजार कर रहे थे।

लड़की की 2 दिन पहले कैंसर से मौत हुई थी। लड़की को तो पुनर्जीवन नहीं मिला लेकिन बाबा को जेल जरूर जाना पड़ा। सैकड़ों लोगों की भीड़ के बाच लड़की को दोबारा जिंदा कर के चमत्कार दिखाने की भोले बाबा की कोशिश तो नाकाम हुई ही, साथ ही मौके पर पहुंची पुलिस बाबा को गिरफ्तार कर के ले गई।

बाबा, चमत्कार और जेल, क्या है पूरा मामला?

हम जिस घटना की बात कर रहे हैं उसका केदारनगर के पास श्मशान घाट पर मल्ला नामक एक चबूतरे से गहरा संबंध है। चौबीस साल पहले, एक 16 साल की लड़की का शव इसी चबूतरे पर रखा गया था। नारायण साकार हरि ने दावा किया था कि वह उस बच्ची को पुनर्जीवित कर सकता है। यह खबर तेजी से फैली और लोग इस कथित चमत्कार को देखने के लिए इकठ्ठा हो गए।

सुबह 11 बजे सूरजपाल बाबा के अनुयायियों द्वारा किए गए वादे के अनुसार लड़की के जीवित होने की उम्मीद में दर्शक बड़ी उम्मीदों के साथ वहां जमा हुए। जैसे-जैसे समय बीतता गया और कुछ नहीं हुआ, अन्य दाह संस्कारों के लिए आए लोग भी इस उम्मीद में इंतजार करते रहे कि शायद उनके मृतक प्रियजन भी पुनर्जीवित हो जाएं।

पुलिस ने किया मामले में हस्तक्षेप

जब यह स्पष्ट हो गया कि कोई चमत्कार नहीं होगा वहां की स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हताश और निराश भीड़ ने हंगामा करना शुरू कर दिया। सुचना पाते ही उस वक्त की स्थानीय पार्षद हेमा परिहार मौके पर पहुंचीं। वहां के हालात और हंगामें को देखते हुए उन्होंने तुरंत पुलिस को बुलाया।

शाहगंज थाने के अधिकारी पहुंचे और नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा को उसके साथियों के साथ गिरफ्तार कर लिया। बाबा की गिरफ्तारी के बाद वहां मौजूद महिलाओं में काफी नाराजगी देखने को मिली। सभी महिलाएं पुलिस कार्रवाई का विरोध कर रही थीं। उनकी आपत्ति के बावजूद भोले बाबा को हिरासत में ले लिया गया।

नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा पर कानूनी कार्यवाही

हेमा परिहार की शिकायत पर 18 मार्च को शाहगंज थाने में सूरजपाल बाबा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। एसआई प्रमोद कुमार सिंह ने एफआईआर दर्ज की जिसमें कुंवरपाल, मेवाराम, प्रेमवती, कमलेश सिंह, मीना और संवारे के नाम शामिल थे। पुलिस ने बताया कि इन लोगों ने मृतक लड़की स्नेहलता को पुनर्जीवित करने के लिए चमत्कारी शक्तियों का इस्तेमाल करने की साजिश रची थी। उन सभी पर ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम-1954 की धारा 2 (सी) के तहत आरोप लगाए गए थे।

कैसे हुए यह मामला बंद?

शाहगंज पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस मामले में पहले चार्जशीट दाखिल की गई थी, लेकिन बाद में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई। जिसके बाद बाबा या उसके साथियों को कोई सजा दिए बिना ही केस बंद कर दिया गया। यह घटना इस बात का एक सटीक उदाहरण है कि कैसे झूठे दावे सार्वजनिक अशांति और कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकते हैं।

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