ईरान और भारत के बीच हुई चाबहार डील तो अमेरिका के पेट में हुआ दर्द
वाशिंगटन। ईरान और अमेरिका के रिश्ते दुनिया को पता हैं और भारत और अमेरिका के रिश्तों की वर्तमान सूरत से भी हर कोई वाकिफ है। लेकिन अमेरिका को एशिया में भारत और ईरान के अच्छे संबंधों वाले समीकरण से लगता है तकलीफ होने लगी है। इसका ताजा उदाहरण है भारत और ईरान के बीच पिछले दिनों हुई चाबहार डील।
'डील से कहीं कोई खतरा तो नहीं'
अमेरिकी सीनेट के सदस्यों ने मंगलवार को बिजनेस के मकसद से भारत की मदद से दक्षिणी ईरान के चाबहार बंदरगाह के विकास पर सवाल खड़ा किया। अमेरिकी सीनेट्स ने पूछा कि क्या इससे अतंराष्ट्रीय प्रतिबंधों के उल्लंघन का खतरा है।
अमेरिकी विदेश विभाग के एक ऑफिसर ने सीनेट के सदस्यों की इस आपत्ति पर जवाब दिया। ऑफिसर ने कहा कि ओबामा प्रशासन ईरान के इस प्रोजेक्ट की बारीकी से जांच करेगा।
डील पर अमेरिका की नजरें
अमेरिकी विदेश विभाग में साउथ और सेंट्रल एशिया मामलों की विदेश उप मंत्री देसाई विश्वाल ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन भारत को ईरान पर लगे प्रतिबंधों की जानकारी देता रहा है।
पिछले दिनों जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पहली ईरान यात्रा पर गए थे तो उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी के साथ चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट की डील साइन की थी। प्रोजेक्ट के लिए 50 करोड़ डॉलर की रकम देने की घोषणा की थी।
भारत के लिए प्रोजेक्ट की अहमियत
इस प्रोजेक्ट के जरिए भारत के लिए ईरान, अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया के साथ व्यापार का रास्ता खुलेगा। पाकिस्तान ने भारत के लिये इस रास्ते को बंद कर रखा था।
ईरान पर लगे हैं कुछ प्रतिबंध
विश्व के छह प्रमुख देशों को ईरान के साथ परमाणु समझौते के बाद यूरोप और अमेरिका ने तेहरान पर लगे प्रतिबंधों को जनवरी में हटा लिया था। लेकिन कुछ प्रतिबंध जारी हैं, जो मानवाधिकार तथा आतंकवाद से जुड़े हैं।













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