सोनिया गांधी को बड़ी राहत, अमेरिकी कोर्ट में कांग्रेस के खिलाफ केस खारिज

कोर्ट ने यह भी तर्क दिया कि ऐसे मामले अमेरिका से जुड़े या उसकी चिंता का विषय नहीं हैं, ऐसे में उनकी सुनवाई अमेरिकी अदालत में नहीं होगी। इस फैसले को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
सिख फॉर जस्टिस को 1984 के दंगों में झटका जज रॉबर्ट स्वीट ने सिख समूह का मुकदमा खारिज करने की कांग्रेस पार्टी की अपील को स्वीकार करते हुए सोमवार को यह आदेश दिया।
इसके तहत मानवाधिकार समूह (एसएफजे) वादी नहीं हो सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि कोई व्यक्तिगत वादी भी कानूनी प्रतिनिधि नहीं है। एसएफजे यह साबित करने में नाकाम रहा कि यह मामला अमेरिका से जुड़ा या उसकी चिंता का विषय है। ऐसे में किसी अन्य संशोधन की अनुमति नहीं है और यह मामला खारिज किया जाता है। सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) ने कहा है कि हम इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे।
अपीलीय अदालत में यह दिखाने की कोशिश की जाएगी कि मामला अमेरिका से पर्याप्त रूप से जुड़ा है और उसके बारे में है। संगठन यह भी दलील देगा कि उसके पास 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के लिए घोषणात्मक फैसले की मांग करने का संस्थागत आधार है।
एसएफजे के पास अपील दायर करने के लिए 23 मई तक का समय है। उसके कानूनी सलाहकार गुरपतवंत सिंह पन्नून ने कहा कि अपील न्यायालय में इस बात के दस्तावेजी सबूत और साक्ष्य मुहैया कराए जाएंगे कि कांग्रेस पार्टी न्यूयॉर्क आधारित संस्था आईएनओसी (इंडियन नैशनल ओवरसीज कांग्रेस)की कार्यप्रणाली को पर आदेश देती है, उसका नियंत्रण करती और उसे निर्देश देती है।
इससे मामले के अमेरिका से जुड़े होने की बात साबित होगी। कानूनी आधार की कमी होने संबंधी आदेश को इस आधार पर चुनौती दी जाएगी कि संघीय कानून मानवाधिकार समूहों को अमेरिकी अदालतों से 'घोषणात्मक निर्णयों' की मांग करने का 'संस्थागत आधार' देता है।












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