Unnao case: कुलदीप सेंगर की उम्रकैद पर रोक के फैसले के खिलाफ CBI सुप्रीम कोर्ट में करेगी चैलेंज

Unnao case: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उन्नाव रेप केस में भाजपा के निष्कासित नेता कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित करने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया है। 23 दिसंबर को दिए गए एक आदेश में, दिल्‍ली हाई कोर्ट ने सेंगर को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था, जबकि निचली अदालत द्वारा दिसंबर 2019 में दी गई दोषसिद्धि के खिलाफ उनकी अपील अभी लंबित है।

हालांकि, सेंगर अभी जेल में ही रहेंगे क्योंकि वह रेपपीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत से जुड़े एक अन्य मामले में 10 साल की सजा काट रहे हैं, और उन्हें उस मामले में जमानत नहीं मिली है।

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हाईकोर्ट ने सेंगर को दी है सशर्त जमानत

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में सेंगर को पीड़िता के निवास स्थान के 5 किलोमीटर के दायरे में न आने और उसे या उसकी माँ को धमकी न देने का निर्देश दिया था; इसके साथ शर्तों के उल्लंघन पर उनकी जमानत स्वतः रद्द हो जाएगी।

उम्रकैद की सजा पर रोक के बाद पीड़िता ने किया विरोध-प्रदर्शन

सीबीआई का यह कदम 25 वर्षीय पीड़िता द्वारा दिल्ली में किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद आया है। पीड़िता ने न्याय की लड़ाई में समर्थन पाने के लिए कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और सोनिया गांधी से भी मुलाकात की, जिन्होंने उसे पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। याद रहे 2017 में जब सेंगर ने पीड़िता का अपहरण और दुष्कर्म किया था, तब वह नाबालिग थी।

पीड़िता बोलीं- ऐसे देश की बेटियां कैसे सुरक्षित रहेंगी?

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, पीड़िता ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, "अगर ऐसे मामले में दोषी को जमानत मिल जाती है, तो देश की बेटियां कैसे सुरक्षित रहेंगी? हमारे लिए यह फैसला 'काल' (मौत) से कम नहीं है। जिनके पास पैसा होता है वे जीतते हैं, जिनके पास पैसा नहीं होता वे हार जाते हैं।"

राहुल गांधी ने उठाया था ये सवाल

राहुल गांधी ने 'एक्स' पर पोस्ट में कहा, "रेप पीड़िता के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार होना चाहिए, उसे अन्याय व डर का सामना कराने के बजाय न्याय सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया, "क्या एक गैंग रेप पीड़िता के साथ ऐसा व्यवहार उचित है? क्या यह उसकी 'गलती' है कि उसमें न्याय के लिए आवाज़ उठाने का साहस है?"

उन्‍होंने इस फैसले को "बेहद निराशाजनक और शर्मनाक" बताया। उन्होंने अपनी पोस्ट में जोड़ा कि यह तब और भी चिंताजनक है जब पीड़िता को "बार-बार परेशान किया जा रहा" है और वह "डर के साए में" जी रही है।

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