मणिपुर हिंसा पर गृह मंत्री अमित शाह की हाईलेवल मीटिंग, जातीय संघर्ष रोकने की बनाई रणनीति
Manipur Violence Issue: मणिपुर में रूक-रूककर हिंसा जारी है। बीते कुछ हफ्तों में पथराव और आगजनी की घटनाओं में इजाफा हुआ है, जिसके मद्देनजर गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर के हालातों पर एक हाई लेवल रिव्यू मीटिंग बुलाई।
मणिपुर में बीते एक साल से हालात तनावपूर्ण हैं। बीच में हिंसा की घटनाओं में कमी आ गई थी, लेकिन बीते कुछ हफ्तों में जातीय संघर्ष बढ़ा गया है, जिसके चलते हजारों परिवारों को मजबूरन भागना पड़ रहा है। हालिया घटनाएं जिरीबाम और मोरेह में बढ़ी हैं।

बीते 13 जून को मोरेह इलाके में उपद्रवियों ने एक स्कूल की इमारत को आग के हवाले कर दिया, इसके अलावा जिरीबाम जिले के कालीनगर में खाली पड़े घरों और दुकानों को फूंक दिया था। वहीं 10 जून को सीएम बीरेन सिंह के एंडवास सुरक्षा टीम पर उपद्रवियों ने गोलियां चलाईं थी।
ऐसे में मणिपुर की स्थिति की समीक्षा करने के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने एक हाईलेवल बैठक बुलाई। यह बैठक मणिपुर राज्यपाल अनुसुइया उइके के गृह मंत्री से उनके कार्यालय में मुलाकात करने और मणिपुर की स्थितियों के बारे में जानकारी दिए जाने के एक दिन बाद हुई है।
एक्शन में गृह मंंत्री, दिए ये निर्देश
बैठक के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने निर्देश दिए कि मणिपुर में हिंसा की कोई और घटना न हो। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय बलों की तैनाती बढ़ाई जाएगी और राज्य में शांति और सौहार्द बहाल करने के लिए केंद्रीय बलों को रणनीतिक रूप से तैनात किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि हिंसा करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह के साथ केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला, खुफिया ब्यूरो प्रमुख तपन डेका, सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे, सेना प्रमुख (पदनाम) लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी, थ्री कोर के GOC एचएस साही, मणिपुर के सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह, मणिपुर के मुख्य सचिव विनीत जोशी, मणिपुर के DGP राजीव सिंह और असम राइफल्स के DG प्रदीप चंद्रन नायर शामिल हुए।
6 जून के बाद से हिंसा का नया दौर शुरू
दूसरी तरफ एनडीए के फिर से सत्ता में आने के बाद गृह मंत्रालय की ओर से की गई यह पहली हाई लेवल मीटिंग है। बता दें कि 6 जून को एक लापता व्यक्ति का सिर कटा शव बरामद होने के बाद पिछले हफ्ते से राज्य में हिंसा का एक नया दौर शुरू हो गया है।
अब तक 225 लोगों की मौत
जिसके चलते 1000 से ज्यादा लोगों को असम और जिरीबाम क्षेत्र के अन्य हिस्सों में सुरक्षित स्थानों पर जान बाचकर भागने के लिए मजबूर होना पड़ा है। मालूम हो कि पिछले साल 3 मई से मणिपुर में कुकी और मैतेई समुदायों के बीच शुरू हुए जातीय संघर्ष में अब तक कम से कम 225 लोगों की जान जा चुकी है और करीब 50,000 लोग बेघर हो गए हैं, जिनमें से कई लोग अभी भी राहत केंद्रों में रह रहे हैं।












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