VIDEO: महिला आरक्षण बिल के लिए जनगणना व परिसीमन के आंकड़े इसिलए जरूरी-निर्मला सीतारमण
Nirmala Sitharaman On Women Reservation Bill: नए संसद भवन में विशेष सत्र के दौरान राज्यसभा में गुरुवार को महिला आरक्षण बिल ( नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023) पर चर्चा हुई, जिसमें केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने भी हिस्सा लिया। (वीडियो नीचे)
निर्मला सीतारमण ने कहा कि महिलाओं के लिए प्रस्तावित आरक्षण के कार्यान्वयन की बात है। विधेयक के अधिनियमित होने के बाद और विधेयक के लागू होने के बाद जब भी पहली जनगणना होती है और उस जनगणना के प्रासंगिक आंकड़े प्रकाशित किए जाते हैं, तो नए सिरे से परिसीमन की भी कवायद की जाती है।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि "मैं उस समय पंचायत राज में 33 प्रतिशत आरक्षण लाने के लिए पूर्व प्रधान मंत्री पीवी नरसिम्हा राव की सरकार को श्रेय देना चाहती हूं। परिणामस्वरूप, हमने पंचायत स्तर पर एक जमीनी सुधार देखा है, जहां आज कई राज्यों द्वारा 33% आरक्षण है। ईएस को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है, जो पंचायत स्तर पर महिलाओं के योगदान को दर्शाता है।"
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बता दें कि महिला आरक्षण बिल से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण मिलेगा। बिल के कानून बनने से लोकसभा और विधानसभाओं की एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हो जाएंगी।
दरअसल, महिला आरक्षण बिल को लागू होने में लंबा वक्त लग सकता है। क्योंकि जनगणना के बाद जब परिसीमन होगा, तब ये कानून लागू होगा। मतलब ये है कि लोकसभा चुनाव 2024 में यह बिल लागू नहीं होगा।
वैसे भी जब तक जनगणना नहीं हो जाती, तब तक परिसीमन नहीं होगा। कोरोना महामारी की वजह से साल 2021 में जनगणना नहीं हुई है। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद ही जनगणना होने की संभावना है। साल 2026 तक परिसीमन पर रोक लगी हुई है। अब जब 2021 की जनगणना होगी, उसके बाद ही लोकसभा सीटों का परिसीमन होगा। हो सकता है कि 2029 या फिर 2034 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण का फायदा मिले।
परिसीमन में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर सीमाएं तय की जाती हैं। पिछला देशव्यापी परिसीमन 2002 में हुआ था। इसे 2008 में लागू किया गया था। परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के भंग होने के बाद महिला आरक्षण प्रभावी हो सकता है।
विधेयक में कहा गया है कि लोकसभा, राज्यों की विधानसभाओं और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधानसभा में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसका मतलब यह हुआ कि लोकसभा की 543 सीटों में से 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।












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