Union Budget 2025: क्या मोदी सरकार का यह बजट 2024 की गलती से मिली सबक का नतीजा है?
Union Budget 2025: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के दूसरे बजट में जिस तरह से मिडिल क्लास पर मेहरबानी दिखाई है,उससे लगता है कि 2024 के अंतरिम बजट में इससे जो सियासी भूल हुई थी, उसकी भरपाई करने की कोशिश की गई है। इस बार के बजट में अगर गरीबों और किसानों पर हर बार की तरह सरकार का फोकस है तो मध्यम वर्ग के लिए एक तरह से आयकर और अन्य माध्यमों से राहत का पिटारा खोल दिया गया है।
अभी पिछले कुछ महीनों से जिस तरह से मध्यम वर्ग मुद्रास्फीति की वजह से महंगाई की सबसे बड़ी मार झेल रहा है, उसमें आयकर दाताओं को अप्रत्याशित राहत देकर मोदी सरकार ने देश के लाखों मध्यम वर्गीय परिवार को राहत दी है।

Union Budget 2025: आयकर और जीएसटी देने वाले मध्यम वर्ग को बजट में मिली बहुत बड़ी राहत
तथ्य यह है कि देश का मध्यम वर्ग ही एक ऐसा वर्ग है जो अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा आयकर भी देता है और जीएसटी पर भी उसकी कमाई का बहुत बड़ा हिस्सा चला जाता है। मोटे तौर पर यह वर्ग भले ही आबादी के 2% के करीब हो,लेकिन यही वह वर्ग है जो देश में बुनियादी ढांचे के विकास और रेवड़ी वाली राजनीति का सबसे ज्यादा भार उठाने को मजबूर है।
पिछले साल अंतरिम बजट (फरवरी,2024) में इस वर्ग को कोई खास राहत नहीं मिल पाई थी। शायद इस वर्ग की निराशा ने भी बीजेपी के 400 पार वाले नारे को मटियामेट करने में बड़ी भूमिका निभाई थी।
बाद में जुलाई 2024 के पूर्ण बजट में मध्यम वर्ग को सिर्फ यह राहत दी गई थी कि न्यू टैक्स रिजीम में स्टैंडर्ड डिक्शन को 50,000 रुपए से बढ़ाकर 75,000 रुपए कर दिया गया था।
Union Budget 2025: मध्यम वर्ग के आयकर दाताओं को मोदी सरकार ने दी अप्रत्याशित राहत
लेकिन, इस बार के बजट में सरकार ने मध्यम वर्ग के हाथ में ज्यादा से ज्यादा पैसे देने पर पूरा फोकस किया है, ताकि वह कमाई का बड़ा हिस्सा खर्च कर सकें, जिससे आर्थिक विकास में भी गति आए। क्योंकि, इस बार के आर्थिक सर्वे का एक्सपर्ट यही नतीजा निकाल रहे हैं कि बिना 8% विकास दर की रफ्तार हासिल किए 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करना नामुमकिन है।
सबसे बड़ा कदम तो ये है कि इस बजट में मोदी सरकार ने मध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर ही निजी आयकर रिफॉर्म पर खास फोकस किया है। इस बजट में मध्यम वर्ग के लिए सबसे बड़ी घोषणा ये है कि न्यू टैक्स रिजीम के तहत 12 लाख रुपए तक आय यानी औसतन एक लाख रुपए तक की सैलरी वालों को इनकम टैक्स से पूरी तरह से मुक्त कर दिया है।
इसमें 75,000 रुपए के स्टैंडर्ड डिडक्शन की वजह से अब 12,75,000 रुपए तक सालाना आय वालों को अब एक भी पैसा इनकम टैक्स नहीं देना होगा।
इस राहत की वजह से मध्यवर्ग से टैक्स देने वाले घरों में पहले से काफी ज्यादा पैसा आएगा तो परिवारों की आमदनी बढ़ेगी, उनकी बचत भी बढ़ेगी, वह ज्यादा खर्च भी कर सकेंगे और निवेश में भी ज्यादा धन लगा सकते हैं। इसकी वजह से देश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। इस फैसले की वजह से सालाना 8 लाख रुपए से लेकर 50,000 लाख रुपए तक कमाने वालों को क्रमश: 30,000 रुपए वार्षिक से लेकर 1,10,000 रुपए तक का फायदा होगा।
पूरा बजट यहां देखिए:-
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