बजट 2014: आ गए नेत्रहीन छात्रों के अच्छे दिन

इस सवाल पर आईआईटी कंप्यूटर साइंस विभाग के हेड ने कार्तिक के नेत्रहीन होने की वजह से पलटकर पूछा कि काम कैसे करोगे। अपने देश की इस स्थिति से दुखी होकर कार्तिक आगे की पढ़ाई पूरा करने के लिए अमरीका के स्टैंफर्ड जा रहे हैं। इससे पहले कार्तिक को ग्याहरवीं कक्षा में विज्ञान वर्ग में दाखिले के लिए बहुत लड़ाई लड़नी पड़ी थी। यह तो है एक मेहनती, साहसी और लगन के पक्के कार्तिक साहनी की कहानी, मगर देश में ऐसे हजारों कार्तिक मौजूद हैं जो संसाधनो और सहयोग के अभाव में जिंदगी में आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार इंडिया में नेत्रहीन लोगों की संख्या 15 मिलियन है। लगभग 2 मिलियन अंधे बच्चे हैं, जिनमें से तीन प्रतिशत ठीक-ठाक ही शिक्षा ग्रहण कर पाते हैं। खेल, शिक्षा, मनोरंजन, आईटी आदि सभी क्षेत्रों में नेत्रहीन छात्र अपनी काबलियत का ढंका बजा रहे हैं। लेकिन सरकार का ढुल-मुल रवैया और शिक्षा विभाग की उदासीनता के आगे वे मजबूर हो जाते हैं। दिल्ली के राष्ट्रीय स्पोर्टस सम्मेलन में नेत्रहीन छात्रों ने परचम लहराया। इसके अलावा फरीदाबाद की रुबी कुमारी नेत्रहीन होते हुए भी तमाम नेत्रहीन बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रही हैं।
आज वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आम बजट पेश किया। जिसमें नेत्रहीन छात्रों के लिए ब्रेल प्रिंटिंग प्रेसों का आधुनिकीकरण करने के लिए राज्य सरकारों को सहायता प्रदान किए जाने की घोषणा की। इसके अलावा विकलांगो के लिए आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए इंसेंटिव देने के लिए कहा हैं। आम बजट में की गई इस घोषणा से बहुत सारे नेत्रहीन छात्रों को सहायता मिलेगी। अब नई तकनीक से प्रशिक्षण लेकर वह आत्मनिर्भर बन पाएंगे। मोदी सरकार की इस घोषणा से लगता है कि नेत्रहीन छात्रों के अच्छे दिन आ गए हैं।












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