NSSO सर्वे: बेरोजगारी ने तोड़ा 45 साल का रिकॉर्ड, नोटबंदी के बाद छुआ 6.1% का आंकड़ा

नई दिल्ली: नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गनाइजेशन (NSSO)के श्रम शक्ति सर्वे के मुताबिक साल 2017-18 में बेरोजगारी ने 45 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इस सर्वे के मुताबिक 2017-18 के वित्तीय वर्ष में बेरोजगारी दर 6.1 फीसदी है जो कि साल 1972-73 के बाद सबसे ज्यादा है। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने ये रिपोर्ट गुरुवार को जारी की है। गौरतलब है कि इस रिपोर्ट को जारी ना करने पर राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के दो सदस्यों पीसी मोहनन और जेवी मीनाक्षी ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया था। पीसी मोहनन एनएससी के कार्यकारी अध्यक्ष भी थे। पीसी मोहनन ने आरोप लगाया था कि एनएससी की मंजूरी के बाद भी सरकार इसे जारी नहीं कर रही है।

नोटबंदी के बाद बढ़ी बेरोजगारी दर

नोटबंदी के बाद बढ़ी बेरोजगारी दर

बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक अभी ये आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है। श्रम शक्ति सर्वे के मुताबिक साल 1972-73 के बाद ये दर सबसे ज्यादा है।गौरतलब है कि नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद के वित्तीय वर्ष के ये आंकड़े हैं। एजेंसी ने ये आंकड़े जुलाई 2017 से जून 2018 तक जुटाए हैं। ग्रामीण इलाकों में 2017-18में 15 से 29 साल के पुरुषों में बेरोजगारी दर 17 फीसदी थी। 2011-12 में ये 5 प्रतिशत थी। वहीं महिलाओं में 2017-18 में बेरोजगारी दर 13.6 फीसदी है जो साल 2011-12 में 4.8 फीसदी थी।

शहरी इलाकों में बढ़ी बेरोजगारी

शहरी इलाकों में बढ़ी बेरोजगारी

शहरी क्षेत्रों में बरोजगारी दर ग्रामीण इलाकों से ज्यादा है। शहरी इलाकों में वित्तीय वर्ष 2017-18 में पुरुषों में बेरोजगारी दर 18.7 फीसदी और महिलाओं में 27.2 फीसदी रही । साल 2017-18 में शिक्षित महिलाओं में ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी दर 17.3 फीसदी है जबकि 2004-05 से 2011-12 के बीच ये 9.7 फीसदी से 15.2 फीसदी थी। ग्रामीण इलाकों में पुरुषों के बेरोजगारी दर साल 2017-18 में 10.5 फीसदी रही जबकि 2004-05 से 2011-12 के बीच ये 3.5 फीसदी से 4.4 फीसदी के बीच थी। श्रम शक्ति की भागीदारी दर, जो काम करने वाली या नौकरी ढूंढ़ने वली वाली जनसंख्या का अनुपात है। 2011-12 में 39 फीसदी से घटकर 2017- 18 में 36.9 फीसदी हो गई है। 2004 -05 के बाद से श्रम शक्ति की भागीदारी लगातार घट रही है। वित्तीय वर्ष 2011-12 की तुलना में 2017- 18 में ये गिरावट तेज गति से थी। लेकिन ये 2009- 10 के अपेक्षा कम तेज गति से है।

बेरोजगारी को लेकर मोदी सरकार निशाने पर

बेरोजगारी को लेकर मोदी सरकार निशाने पर

बेरोजगारी की जगह रोजगार देने का मुद्दा नरेंद्र मोदी सरकार में काफी विवादों में है और सरकार को इसे लेकर आलोचना का सामना भी करना पड़ा है। नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार की पांच सालों में पर्याप्त रोजगार ना देने को लेकर आलोचना हो रही है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी हर रोज़ केंद्र सरकार पर रोजगार ना देने को लेने को लेकर हमला कर रहे हैं। वहीं सरकार इन आलोचनाओं को खारिज करती है। उसका मानना है कि उसकी शुरू की गई योजनाओं से लाखों नौकरियां पैदा हुई हैं।

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