'अब नहीं कर सकेंगे पुरस्कार वापस', संसदीय समिति ने अवॉर्ड वापसी पर रोक लगाने के लिए सरकार से की सिफारिश
देश में अवॉर्ड वापसी की चर्चा एक बार फिर शुरू हो गई है। मणिपुर हिंसा बीच राज्य के टॉप एथलीट्स ने अवॉर्ड वापसी की धमकी दी है। उन्होंने कहा कि करीब ढाई महीने से मणिपुर जल रहा है, लेकिन अब तक राज्य में शांति स्थापित नहीं हुई है। अगर ऐसा जारी रहा है तो हमलोग अवॉर्ड वापस कर देंगे।
वहीं, इससे पहले कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे पहलवानों ने अपने मेडल को गंगा में बहाने के लिए हरिद्वार पहुंच गए थे। इससे पहले भी कई ऐसी घटनाएं आई हैं, जिससे खिलाड़ियों ने अपने पदक वापस किए हैं।

इस मामले को रोकने के लिए संसदीय समिति ने एक सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि भविष्य में कोई पदक वापस न करें, इसके लिए एक अंडरटेकिंग भरने की जरूरत है। इस पर सहमति देना जरूरी होगा कि भविष्य में मेडल वापस नहीं करूंगा।
समिति ने कहा कि कुछ राजनीतिक मुद्दों, जो सांस्कृतिक दायरे से बाहर हैं, इसके विरोध में मेडल प्राप्त करने वाले पुरस्कार लौटा देते हैं। इससे पुरस्कारों की समग्र प्रतिष्ठा पर असर पड़ता है।
इसके अलावा, समिति ने यह भी प्रस्ताव दिया कि सरकारी पुरस्कार प्राप्त करने वालों को अपनी लिखित सहमति भी देनी चाहिए और सहमति पर हस्ताक्षर करना चाहिए। समिति ने कहा कि किसी भी संगठन द्वारा दिए जाने वाले पुरस्कार किसी कलाकार का सम्मान करते हैं और इसमें राजनीति के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
समिति ने इसे 'अपमानजनक' बताते हुए सुझाव दिया कि जब भी कोई पुरस्कार दिया जाए तो प्राप्तकर्ता की सहमति ली जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि पुरस्कार लौटाए जाने की स्थिति में पुरस्कार विजेता के नाम पर भविष्य में ऐसे पुरस्कार के लिए विचार नहीं किया जाएगा।












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