सीमा पर खुफिया सुरंग ने उजागर किया इमरान खान का नापाक चेहरा, ये है असली प्लान

Underground Tunnel on India-Pakistan Border: नई दिल्ली। भारत में आतंकियों को भेजने की एक और कोशिश बुधवार को सुरक्षाबलों ने नाकाम कर दी। बीएसएफ ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान द्वारा बनाई एक टनल को खोज निकालने में सफलता हासिल की है जिसे जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को दाखिल करने के लिए बनाया गया था। इसके पहले भारतीय सुरक्षा बलों ने नवम्बर के आखिर में एक सुरंग खोज निकाली थी।

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    पेशेवर इंजीनियरों ने तैयार की सुरंग

    पेशेवर इंजीनियरों ने तैयार की सुरंग

    बीएसएफ 173 बटालियन की एंटी टनल पार्टी गश्त कर रही थी इसी दौरान जम्मू क्षेत्र के कठुआ जिले में भारतीय सीमा की तरफ ये सुरंग दिखाई दी। सुरंग का निर्माण अंतरराष्ट्रीय सीमा पर किया गया था जिसके आतंकियों को इसके जरिए पार कराया जा सके। टनल के अंदर रेत की बोरियां रखी थीं जिस पर पाकिस्तानी कंपनी का नाम है। सुरंग मिलने के बाद बीएसएफ ने अधिकारियों को सूचित किया और इलाके में जांच अभियान चलाया।

    बीएसएफ ने बताया कि नवम्बर में मिली भूमिगत सुरंग की तरह की इस सुरंग को पेशवर इंजीनियरों के जरिए तैयार किया गया है जिनके जरिए पाकिस्तान सेना द्वारा आतंकी कैम्पों में प्रशिक्षित कर तैयार किए गए आतंकियों को भेजा जाता है।

    एक वरिष्ठ अधिकारी ने सूत्रों के हवाले से बताया सुरंग में जिस जगह से प्रवेश किया जाना है वह जगह बॉर्डर पर जीरो लाइन से 300 फीट दूर है। भारत ने जो बाड़ लगाई है उससे इस सुरंग का एंट्री प्वाइंट 65 फीट दूर है। सुरंग 3 फीट चौड़ी है और करीब 25 से 30 फीट की गहराई में बनाई गई है।

    पाकिस्तान आतंकियों के लिए तैयार कर रहा नया रास्ता

    पाकिस्तान आतंकियों के लिए तैयार कर रहा नया रास्ता

    लेकिन इस बार बीएसएफ ने खुफिया सुरंग को अचानक ही नहीं पाया। बीएसएफ ने बताया कि पिछली बार नवम्बर में जो टनल मिली थी उसके बाद हमने ये पाया कि पाकिस्तान सेना सीमा पार से आतंकियों को भेजने के लिए नए रास्ते से घुसाने की कोशिश कर रही है जिसके बाद हमने स्पेशल टीम बनाई है जो इस पर नजर रख रही है।

    वहीं आतंक निरोधी अभियान में जुड़े लोगों को कहना है कि ये टनल इस इलाके में पाकिस्तान रेंजर्स द्वारा बार-बार की जा रहे सीजफायर उल्लंघन की वजह भी काफी हद तक समझा देता है। दरअसल पाकिस्तानी रेंजर्स सीजफायर का उल्लंघन सुरक्षा बलों का ध्यान भटकाने के लिए करते हैं। बार-बार सीजफायर उल्लंघन से भारतीय सुरक्षा बल रेंजर्स को जवाबी कार्रवाई करते हैं। इस दौरान आतंकी इन सुरंगों के माध्यम से घुसपैठ करते हैं। लेकिन अब पाकिस्तान की ये रणनीति उसी पर भारी पड़ रही है। भारतीय सुरक्षा बल उन जगहों को चिह्नित कर रहे हैं जहां से ज्यादा सीजफायर उल्लंघन होते हैं। फिर इन जगहों पर घुसपैठ की आशंका वाली जगहों को तलाश किया जाता है।

    जम्मू-कश्मीर में सीजफायर उल्लंघन में बढ़ोतरी

    जम्मू-कश्मीर में सीजफायर उल्लंघन में बढ़ोतरी

    इस दौरान जम्मू और कश्मीर में पाकिस्तान की तरफ से सीजफायर उल्लंघन में काफी बढ़ोतरी हुई है। जम्मू कश्मीर पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक 2020 में सीजफायर उल्लंघन की 930 घटनाएं हुई थीं जो कि पिछले साल के 605 के मुकाबले में 54 प्रतिशत ज्यादा थीं। इसके साथ ही पाकिस्तान की तरफ से आतंकियों की भर्ती में भी 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

    पाकिस्तान की तमाम कोशिश के बावजूद सुरक्षा बल आतंकियों पर भारी पड़ रहे हैं। एक शीर्ष जम्मू कश्मीर पुलिस अधिकारी के मुताबिक 2020 में 174 आतंकियों को पाकिस्तान ने भर्ती किया था जिनमें केवल 52 अभी सक्रिय हैं। 50 को गिरफ्तार कर लिया गया या उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया जबकि 76 आतंकी सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए।

    पाकिस्तान सेना का सुरंग के जरिए आतंकियों को भेजने की कोशिश दरअसल पाकिस्तान की हताशा दर्शाती है कि किस तरह पाकिस्तान कश्मीर में हिंसा को भड़काना चाह रहा है। इन सुरंगों के मिलने से पता चल रहा है कि जनरल बाजवा का अभी पाकिस्तान में आतंकी कैंपों को बंद करने का कोई इरादा नहीं है।

    मुश्किल से बचने के लिए इमरान की नजर कश्मीर पर

    मुश्किल से बचने के लिए इमरान की नजर कश्मीर पर

    सिर्फ यही नहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को जिस तरह से विपक्ष ने घेर रखा है उससे पाकिस्तान की जनता का ध्यान हटाने के लिए इमरान खान को भी किसी तरह कश्मीर को चर्चा में बनाए रखना जरूरी हो गया है। वे हर कोशिश कर रहे हैं कि कश्मीर में ऐसा कुछ हो जिससे विपक्ष का दबाव उनके ऊपर से हटे। इसके इमरान खान और जनरल बाजवा कश्मीर में कुछ न कुछ करने की कोशिश में लगे हुए हैं।

    विपक्षी दलों द्वारा चलाया गया पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) देश में लगातार पीएम इमरान खान के खिलाफ रैलियां कर रहा हैं और इसे खूब समर्थन भी मिल रहा है। अगर ऐसे में पाकिस्तान में आर्थिक स्थिरता का संकट भी है और इसे ठीक नहीं किया गया तो सरकार बिखर सकती है। यही वजह है कि इमरान खान अपनी नाकामियों की तरफ से किसी तरह जनता का ध्यान हटाना चाह रहे हैं और इसके लिए कश्मीर से अच्छा विकल्प पाकिस्तान में कुछ दूसरा नहीं हो सकता है।

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