जम्मू-कश्मीर पर मध्यस्थता को लेकर UN से पाकिस्तान को झटका कहा- हमारा स्टैंड नहीं बदला

नई दिल्ली- जम्मू-कश्मीर के मसले पर पाकिस्तान को एक बार से संयुक्त राष्ट्र में तगड़ा झटका लगा है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कश्मीर मसले पर मध्यस्थता की उसकी अपील को सिरे से खारिज करते हुए दो टूक कह दिया है कि इस मसले में वह अपने पुराने स्टैंड पर कायम है और दोनों देशों को आपसी बातचीत के जरिए ही यह मसला सुलझाना होगा। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के प्रवक्ता ने जी-7 के दौरान गुतारेस की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई बातचीत का भी हवाला दिया। दरअसल, भारत अंतरराष्ट्रीय जगत को पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि जम्मू-कश्मीर उसके आंतरिक मसला है और इसपर किसी तीसरे पक्ष की दखल का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता।

दोनों देश बातचीत से हल निकालें- यूएन

दोनों देश बातचीत से हल निकालें- यूएन

जम्मू-कश्मीर पर मध्यस्थता की पाकिस्तान की ओर से की जा रही अपील पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा है कि सेक्रटरी जनरल दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने को लेकर बहुत चिंतित हैं। उन्होंने दोनों देशों से अपील की है कि वे मसले को बातचीत के जरिए हल निकालें। इस मसले पर गुतारेस ने सोमवार को यूएन में पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोढ़ी निवेदन पर उनसे मुलाकात भी की थी। दरअसल, दुजारिक इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या इस महीने होने वाली यूएन जनरल असेंबली की बैठक के दौरान गुतारेस की भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की कोई योजना है। गौरतलब है कि यूएन जनरल असेंबली के सत्र को प्रधानमंत्री मोदी और पाकिस्तानी पीएम इमरान खान भी संबोधित करने वाले हैं।

मध्यस्थता पर हम अपने स्टैंड पर कायम- संयुक्त राष्ट्र

दरअसल, कश्मीर पर मध्यस्थता की रट लगाए पाकिस्तान को तब भारी फजीहत झेलनी पड़ गई, जब यूनाइटेड नेशन की ओर से आधिकारिक तौर पर उसकी अपील ठुकरा दी गई। गौरतलब है कि भारत हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्पष्ट कर चुका है कि जम्मू-कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और वहां पिछले महीने जो भी कदम उठाए गए हैं, वह उसकी संप्रभुता के दायरे में है। लिहाजा यूएन सेक्रेटरी जनरल की ओर से जारी बयान में पाकिस्तान को झटका देते हुए स्थिति पूरी तरह से साफ कर दी गई है। एंतोनियो गुतारेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा है कि, 'मध्यस्थता पर हमारी स्थिति हमेशा से वही है। महासचिव ने पाकिस्तान और भारत की सरकारों से संपर्क किया था। जी-7 की बैठक के दौरान वे भारत के प्रधानमंत्री से मिले। उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्री से भी बात की थी।' गौरतलब है कि बाकी देशों की तरह संयुक्त राष्ट्र भी कश्मीर को द्विपक्षीय मसला बताता रहा है और हमेशा से मध्यस्थता की बात से इनकार करता रहा है।

झूठ की रनिंग कमेंट्री कर रहा है पाकिस्तान

झूठ की रनिंग कमेंट्री कर रहा है पाकिस्तान

उधर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भी भारत ने साफ तौर पर कहा है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना पूरी तरह आंतरिक फैसला है, जिसपर संसद ने मुहर लगाई है। कोई भी देश अपने आंतरिक मामले में दखलअंदाजी नहीं चाहेगा, भारत भी नहीं। यही नहीं भारत की ओर से गया कि हमारा संविधान बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों के मूल अधिकारों की गारंटी देता है। हमारी स्वतंत्र न्यायपालिका, फ्री मीडिया, वाइब्रेंट सिविल सोसाइटी मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए एक बेहतर माहौल तैयार करती है। दुनिया और खासकर भारत राज्य प्रायोजित आतंकवाद का काफी शिकार हुए हैं। इस मुद्दे पर चुप्पी से आतंकियों और उनके समर्थकों का हौसला बढ़ता है। यही नहीं पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए ये भी कहा गया कि एक ग्रुप यहां झूठे आरोपों की रनिंग कमेंट्री कर रहा है और जो ग्लोबल टेररिज्म का केंद्र है वही भारत पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के झूठे आरोप लगा रहा है।

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