Bihar News: पटना में अल्ट्रा पॉड्स प्रोजेक्ट को मिली रफ्तार, 296 करोड़ की स्मार्ट मोबिलिटी योजना पर अहम बैठक
पटना जल्द ही अल्ट्रा पीआरटी पहल के तहत एक पूरी तरह से स्वचालित अल्ट्रा पॉड्स ट्रांजिट सिस्टम की मेजबानी करेगा, जो पांच किलोमीटर में नौ स्टेशनों को जोड़ेगा। 59 पॉड्स, 7-सेकंड के अंतराल और पर्यावरण के अनुकूल, कार्बन-पॉजिटिव ऑपरेशंस के साथ, 296 करोड़ रुपये की परियोजना का लक्ष्य सुरक्षा में सुधार करना, यात्रा के समय को कम करना और शहरी भीड़भाड़ को कम करना है।
बिहार की राजधानी पटना को जल्द ही आधुनिक और स्मार्ट परिवहन व्यवस्था की नई सौगात मिलने जा रही है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने गुरुवार को लार्सन एंड टुब्रो (L&T) की टीम के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक कर पटना में ‘अल्ट्रा पॉड्स’ (UltraPODs by Ultra PRT) परियोजना की रूपरेखा पर चर्चा की। बैठक में एलएंडटी की ओर से विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया, जिसमें पुराने सचिवालय परिसर को आसपास के प्रशासनिक भवनों से जोड़ने के लिए एक स्मार्ट और सस्टेनेबल मोबिलिटी सिस्टम का प्रस्ताव रखा गया। प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद इस परियोजना को लगभग 15 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

यह परियोजना एक तेज, आधुनिक और पूरी तरह स्वचालित ट्रांजिट सिस्टम होगी, जो सरकारी अधिकारियों के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी। पर्सनल रैपिड ट्रांजिट (PRT) प्रणाली के तहत पॉड्स निर्धारित भवनों के बीच बिना रुके सीधे गंतव्य तक पहुंचेंगे। इससे सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी और यात्रा समय में भी कमी आएगी।
296 करोड़ की परियोजना, 5 किमी लंबा ट्रैक
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लागत 296 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। अल्ट्रा पॉड्स के लिए लगभग 5 किलोमीटर लंबा ट्रैक बनाया जाएगा। इसका संचालन विश्वेश्वरैया भवन से शुरू होकर विकास भवन और विधान सभा होते हुए पुराने सचिवालय तक किया जाएगा।
हर 7 सेकंड में उपलब्ध होगा पॉड
यात्रियों की सुविधा के लिए मात्र 7 सेकंड के अंतराल पर अगला पॉड स्टेशन पर उपलब्ध रहेगा। एक पॉड में 6 लोगों के बैठने की क्षमता होगी और इस रूट पर कुल 59 पॉड्स का संचालन किया जाएगा।
9 स्टेशन और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर
परियोजना के पहले चरण में कुल 9 स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें से 2 स्टेशनों के पास पार्किंग सुविधा भी उपलब्ध होगी। इसके अलावा एक कंट्रोल रूम और एक अल्ट्रा पॉड पार्किंग सुविधा का निर्माण भी किया जाएगा।
पूरी तरह स्वचालित और सुरक्षित
अल्ट्रा पॉड्स पूरी तरह स्वचालित प्रणाली पर आधारित होंगे और इनमें किसी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप नहीं होगा। सुरक्षा के लिए सभी पॉड्स में कैमरे लगाए जाएंगे, जिससे यात्रा और संचालन दोनों सुरक्षित रहेंगे।
पर्यावरण के अनुकूल होगी व्यवस्था
यह परियोजना पर्यावरण के अनुकूल और कार्बन-पॉजिटिव नेटवर्क पर आधारित होगी। अल्ट्रा पॉड्स के ट्रैक निर्माण में किसी भी पेड़ को नहीं काटा जाएगा। मोटर चालित वाहनों की आवाजाही कम होने से प्रदूषण और ट्रैफिक जाम में भी कमी आएगी।
ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत
यह व्यवस्था खासतौर पर सुबह और शाम के कार्यालय समय में भीड़ को कम करने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है। इससे आम लोगों को भी ट्रैफिक जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। अल्ट्रा पॉड्स का किराया भी काफी मामूली रखा जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका उपयोग कर सकें। यात्री टोकन या रिचार्जेबल कार्ड के माध्यम से इस सेवा का लाभ उठा सकेंगे।
बिहार सरकार की यह पहल केंद्र सरकार के स्मार्ट, सस्टेनेबल और इंटीग्रेटेड मोबिलिटी के व्यापक विजन के अनुरूप है। इस परियोजना के शुरू होने से प्रशासनिक भवनों के बीच आवागमन आसान होगा, सुरक्षा मजबूत होगी और कार्य संचालन की दक्षता में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।












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