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आंध्रप्रदेश: दो महिला अफसरों को मिली 'दिशा' एक्ट की जिम्मेदारी, 21 दिन में मिलेगा न्याय

अमरावती। आंध्रप्रदेश में दिशा एक्ट की निगरानी के लिए दो महिला अधिकारियों को नियुक्त किया गया है। ये कानून (आंध्रप्रदेश आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम 2019) हैदराबाद में दिशा गैंगरेप और हत्या मामले के बाद बीते साल 13 दिसंबर को राज्य विधानसभा में पारित किया गया था। सरकार ने इस तरह के मामलों में दोषियों को जल्द सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए दिशा एक्ट पारित किया था।

ये दो महिला अधिकारी करेंगी निगरानी

ये दो महिला अधिकारी करेंगी निगरानी

इसमें 21 दिनों के भीतर ट्रायल पूरा कर फांसी की सजा देने का प्रावधान रखा गया है। जिसे 'आंध्रप्रदेश दिशा एक्ट' नाम दिया गया। IAS डॉक्टर कृतिका शुक्ला और IPS एम. दीपिका को इस कानून से जुड़े मामलों के लिए विशेष अधिकारी के तौर पर नियुक्त किया गया है। डॉक्टर कृतिका शुक्ला इस समय महिला एवं बाल विकास में बतौर निदेशक तैनात हैं। उन्हें 'दिशा' विशेष अधिकारी का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। वहीं एम. दीपिका कुरनूल में एएसपी के पद पर तैनात थीं। उन्हें वहां से ट्रांसफर कर बतौर 'दिशा' विशेष अधिकारी के तौर पर चुना गया है।

सुनवाई 21 दिन के भीतर पूरी होगी

सुनवाई 21 दिन के भीतर पूरी होगी

इस बिल के तहत रेप और गैंगरेप करने वाले दोषियों को मौत की सजा दी जाएगी। साथ ही मामले की सुनवाई भी 21 दिन के भीतर पूरी कर ली जाएगी। इस कानून को महिला सुरक्षा की दिशा में बेहद बड़ा कदम माना जा रहा है। हैदराबाद की पीड़िता को दिशा नाम दिया गया था और इस कानून को भी दिशा नाम दिया गया है।

ये सभी अपराध होंगे शामिल

ये सभी अपराध होंगे शामिल

कानून के अनुसार, 14 दिनों के भीतर ट्रायल पूरा कर लिया जाएगा और 21 दिन में अदालत फैसला सुनाएगी। महिलाओं और बच्चों के साथ यौन शोषण, तेजाब से हमला और छेड़छाड़ जैसे सभी अपराधों को इसमें शामिल किया गया है। इस कानून के आने से पहले राज्य के मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने ऐलान कर कहा था कि राज्य सरकार आंध्रप्रदेश आपराधिक कानून में संशोधन करेगी। ताकि ऐसे अपराधों में प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा किया जाए और दोषी को कड़ी से कड़ी सजा मिले।

विशेष अदालतें स्थापित होंगी

विशेष अदालतें स्थापित होंगी

सरकार राज्य में विशेष अदालतें स्थापित करेगी, जहां महिलाओं और बच्चों पर हमले और यौन शोषण के मामलों की सुनवाई की जाएगी। सरकार ने ये भी फैसला किया है कि सोशल मीडिया पर महिलाओं के साथ बदसलूकी करने वालों पर भी केस दर्ज किया जाएगा। ऐसे मामलों में पहली बार पकड़े गए दोषी को दो साल तक की जेल की सजा होगी और अगर वह दोबारा ऐसा ही अपराध करता है तो सजा को दोगुना कर दिया जाएगा। दिशा एक्ट में दोषी के लिए अपील करने का समय भी कम कर दिया गया है। इसे 6 महीने से घटाकर 45 दिन कर दिया गया है।

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