Operation Dost: तुर्की के लिए अभी भी क्यों भावुक हो रहे हैं, वहां से लौटे भारतीय बचावकर्मी ?

Operation Dost:तुर्की से आए भारतीय बचावकर्मियों के पास एक से एक भावुक कर देने वाली यादें रह गई हैं। सबका कोई ना कोई अपना किस्सा है। वहां के लोगों ने जितना प्यार और स्नेह दिया है,वह अब उनके जीवन का हिस्सा बन गया है।

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ऑपरेशन दोस्त के लिए एक पैरामेडिक अपने डेढ़ साल के जुड़वां बच्चों को छोड़कर तुर्की गई थी। अधिकारियों को अभी भी याद है कि किस तरह से बचाव टीम में शामिल 140 लोगों का पासपोर्ट तैयार करने के लिए विदेश विभाग के अफसरों को रातों-रात सैकड़ों दस्तावेजों की पड़ताल करनी पड़ी। एनडीआरएफ के मिशन पर गई टीम भूकंप प्रभावित तुर्की से लौट आई है। उन्हें 10 दिनों के ऑपरेशन में वहां नहाने तक का भी मौका नहीं मिला। लेकिन, वहां की यादें उनके दिलों में बस चुकी हैं। काम प्रोफेशनल था, लेकिन सारी चुनौतियों का सामना करने के बावजूद यह पर्सनल और इमोशनल हो चुका है। लौट तो आए हैं, लेकिन कइयों का मन अभी भी भारी है। बहुत सारी यादें हैं, जो सारी मुश्किल चुनौतियां झेलने के बावजूद भावुक कर देती हैं।

तुर्की से बहुत ही भावुक रिश्ता लेकर लौटे हैं भारतीय बचावकर्मी

तुर्की से बहुत ही भावुक रिश्ता लेकर लौटे हैं भारतीय बचावकर्मी

तुर्की में ऑपरेशन दोस्त के तहत एनडीआरएफ की 152 सदस्यीय तीन टीमें गई थीं। इनके साथ 6 श्वान भी थे। भूकंप के बाद उन्हें वहां अचानक पहुंचने का संदेश मिला था। आनन-फानन में वह भयावह भूकंप वाले क्षेत्र में उतारे गए थे। लेकिन, वहां से निकलना बहुत ही 'छूने वाला और भावनात्मक' पल हो गया था। इनका कहना है कि भूकंप पीड़ित लोगों के साथ इतने ही दिनों में एक गजब का भावनात्मक रिश्ता बन गया। वह खुद मुसीबत में थे, लेकिन फिर भी हर कदम मदद के लिए आतुर रहते थे। रवानगी के समय कई तुर्की वासियों की आंखें डबडबा गयी थीं और अपने 'हिंदुस्तानी' दोस्तों और 'बिरादर' के लिए धन्यवाद और आभार वाला भाव था। 7 फरवरी से शुरू हुए ऑपरेशन में भारतीय बचावकर्मियों ने दो युवा लड़कियों को जिंदा बचाया है और मलबे से 85 शवों को बाहर किया है। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर इनका अभिनंदन किया है।

रातों-रात बनाए गए थे पासपोर्ट

रातों-रात बनाए गए थे पासपोर्ट

एनडीआरएफ के आईजी एनएस बुंदेला ने बताया है कि विदेश मंत्रालय के पासपोर्ट और वीजा काउंसलर ने बचावकर्मियों के लिए कैसे रातों-रात पासपोर्ट तैयार किया था। भारत सरकार से निर्देश मिलने के बाद टीम को तुर्की भेजने के लिए मिनटों में सैकडों दस्तावेजों को प्रोसेस किया गया। एक अधिकारी ने कहा है कि 152 में से सिर्फ कुछ अधिकारियों के पास ही डिप्लोमेटिक पासपोर्ट थे, जो विदेशी जमीन पर उतर सकते थे। सेकंड-इन-कमांड (ऑपरेशन) रैंक के अधिकारी राकेश रंजन ने कहा, 'तुर्की ने हमारी टीम को वीजा ऑन अराइवल दिया और हमें नूर्दगी और हते में लैंडिंग करते ही तैनात कर दिया गया था।'

तुर्की के लोगों से कैसे बन गया दिल का रिश्ता....

तुर्की के लोगों से कैसे बन गया दिल का रिश्ता....

भारतीय टीम के साथ तुर्की के लोगों ने जिस तरह बर्ताव किया है, वह दिल छू लेने वाला है। यही वजह है कि भारतीय बचावकर्मियों के दिलों में उनके साथ एक अलग ही रिश्ता जुड़ चुका है। इसके बारे में एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट दीपक ने बहुत ही मार्मिक बात बताई है। वहां एक अहमद नाम के पीड़ित मिले। भूकंप में उनकी पत्नी और तीन बच्चों की जान चली गई है। लेकिन, खुद पर गम का पहाड़ टूटने के बावजूद उन्होंने इस बात का ध्यान रखा कि वे (डिप्टी कमांडेंट) पूरी तरह से शाकाहारी हैं। कहते हैं जो बात शब्दों से नहीं समझ में आती है, वह दिलों की भाषा से समझी जा सकती है। वो बोले, 'अहमद को किसी तरह से पता चल गया कि मैं शाकाहारी हूं। कई दिनों तक नूर्दगी में जहां कहीं भी तैनात रहता था, वह मेरे पास आ जाते थे और उनके पास जो भी शाकाहारी चीज होती थी, चाहे सेब हो या टमाटर वह चुपचाप मुझे थमा जाते थे। वह उसे नमक या स्थानीय मसालों से तैयार करके लाते थे, ताकि खाने में स्वादिष्ट लगे।'

काश हम और जिंदगियां बचा पाते.....

काश हम और जिंदगियां बचा पाते.....

दीपक ने कहा है कि जब वह रवाना होने लगे तो 'उन्होंने मुझे गले लगा लिया और मुझे बिरादर कहकर बुलाया। यह ऐसा है, जिसे मैं कभी नहीं भुला पाऊंगा।' सेकंड-इन-कमांड रैंक अधिकारी वीएन पाराशर ने कई बैज दिखाए जो सेना या पुलिस वालों की वर्दी पर लगाए जाते है। यह वहां के स्थानीय लोगों ने यादगार उपहार के तौर पर उन्हें सौंपे हैं। जबकि, उनसे और उनकी टीम के सदस्यों से 'एनडीआरएफ-इंडिया और एनडीआरएफ लोगो' के बैज ले लिए, जिसे वह भारतीय दोस्तों की याद के तौर पर सहेज कर रखेंगे। जब वे चलने लगे तो उनके और बाकियों के नंबर पर व्हाट्सऐप मैसेज भी आए, जिसमें गूगल से हिंदी में अनुवाद करके उन्हें धन्यवाद दिया है। वो बोले, 'स्थानीय लोग हिंदी या अंग्रेजी नहीं जानते थे। हमने जो देखा वह मानवता की भाषा और भारत के प्रति सम्मान था। काश हम और जिंदगियां बचा पाते.....लेकिन, हमें वहां इतना प्यार मिला, जो कि आसानी से नहीं पाया जा सकता है।'

शाहरुख, सलमान और दीपिका के फैन हैं तुर्की वासी!

शाहरुख, सलमान और दीपिका के फैन हैं तुर्की वासी!

एनडीआरएफ के कई बचावकर्मियों ने कहा है कि स्थानीय लोगों ने बहुत भावुक होकर भारतीय सिनेमाओं और शाहरुख, सलमान और दीपका जैसे अभिनेता-अभिनेत्रियों के बारे में बात की। सब-इंस्पेक्टर शिवानी अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने उनके साथ सेल्फियां भी लीं और कहा कि 'अगर आप उनसे (भारतीय अभिनेता-अभिनेत्रियों से) मिलें तो कहें कि तुर्की के लोग उनसे प्यार करते हैं।' उनके मुताबिक एक महिला तो हिंदी गाने गुनगुना भी लेती थी और डांस के स्टेप भी मैच कर रही थी।

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    10 दिनों तक बिना नहाए रहे बचावकर्मी

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    32 साल की कॉन्सटेबल सुषमा यादव पांच महिला बचावकर्मियों में शामिल थीं। उन्होंने अपनी ड्यूटी की खातिर डेढ़ साल के जुड़वां बच्चों को सास-ससुर के पास छोड़ा था। वहीं सब-इंस्पेक्टर बिंटू भोरिया ने बताया कि कैसे तुर्की में 10 दिनों तक उनमें से किसी ने नहीं नहाया। एक और अधिकारी ने कहा कि एनडीआरफ के लोगों ने स्पंज बाथ लिया और शौच और पेशाब के लिए गड्ढे खोदे। एनडीआरएफ अधिकारी विपिन प्रताप सिंह ने कहा, 'वैसे हमने यह सुनिश्चित किया कि हम जहां भी ठहरे, उस स्थान को साफ कर दिया। लौटते समय हम अपने साथ सिर्फ तुर्की के लोगों का प्यार और स्नेह लेकर आए और अपने टेंट, खाना, निजी कपड़े, गर्म कपड़े आदि को स्थानीय लोगों और तुर्की के बचाकर्मियों को दे दिया।' (इनपुट-पीटीआई)


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