त्रिपुरा हिंसा: बीजेपी विधायकों ने अपनी ही सरकार पर बोला हमला, CM बिप्लब की चुप्पी पर उठाए सवाल
अगरतला, 24 नवंबर: त्रिपुरा में नगर निकाय चुनावों से पहले सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो विधायकों ने राज्य में हालिया राजनीतिक हिंसा को लेकर अपनी ही सरकार की खिंचाई की है। बीजेपी के दो विधायकों सुदीप रॉय बर्मन और आशीष साहा ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि, देश के शीर्ष न्यायालय, त्रिपुरा उच्च न्यायालय और यहां तक कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी हाल ही में नगर नियाक चुनावों से पहले हुई राजनीतिक हिंसा में हस्तक्षेप करना पड़ा है।

सुदीप रॉय बर्मन ने कहा कि, माकपा के कार्यकाल के दौरान राज्य में राजनीतिक हिंसा की संस्कृति थी जो अब एक लोकतंत्र विरोधी खतरे में बदल गई है। लोगों और उम्मीदवारों के खिलाफ अत्याचार किए जा रहे हैं जिन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि त्रिपुरा हमेशा उत्सव के मूड में चुनाव देखता है लेकिन इस बार आतंक का शासन चल रहा है। मैं राज्य के लोगों से आगे आने और वापस लड़ने की अपील करता हूं। अपने मताधिकार का प्रयोग करें और गुंडों का साहसपूर्वक सामना करें।
भाजपा विधायकों ने राज्य में हालिया हिंसा पर मुख्यमंत्री बिप्लब देब की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि, हमें समझ में नहीं आता कि नगर निकाय चुनाव जीतने के लिए इतनी हिंसा क्यों हो रही है? अगर बीजेपी ने अपने 44 महीने के कार्यकाल में इतना विकास किया था तो चुनाव जीतने के लिए इतनी हिंसा क्यों? हमारे मुख्यमंत्री, जो राज्य के गृह मंत्री भी हैं, ने हालिया राजनीतिक हिंसा के बारे में कोई बयान नहीं दिया है।
बीजेपी एमएलए ने आगे कहा कि, पुलिस ने मूक दर्शक के रूप में काम किया। माकपा के गुंडे पार्टी में आ गए और उनका राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इन विधायकों के बयान ऐसे समय पर आए हैं, जब त्रिपुरा में हाल में कई जगहों पर हिंसा हुई थी। तृणमूल कांग्रेस राज्य में विस्तार में लगी और वह आरोप लगाती रही है कि टीएमसी को रैली व सभाएँ नहीं करने दी जा रही हैं और उसपर हमले किए जा रहे हैं।
इससे पहले बर्मन राज्य के डीजीपी वीएस यादव को पत्र लिखकर पुलिस पर सवाल उठाए हैं। बर्मन ने पत्र में आरोप लगाया कि राज्य में बदमाशों और अपराधियों का दबदबा है। खुलेआम कानून को हाथ में लिया जा रहा है। उन्होंने अपने पत्र में आगे लिखा है कि राज्य में आतंक और भय व्याप्त है। बता दें कि बिप्लब देब के खिलाफ लंबे समय से कुछ विधायकों में असंतोष व्याप्त है। पिछले साल अक्टूबर में कम से कम 7 विधायक मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को बदलने की माँग को लेकर दिल्ली में पहुँच गए थे। ये विधायक बिप्लब कुमार देब को 'तानाशाह', 'अनुभवहीन' और 'अलोकप्रिय' होने का आरोप लगा रहे थे।
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