3.98 लाख करोड़ पार कर जाएगा आंध्र प्रदेश का कर्ज- केंद्र
नई दिल्ली, 26 जुलाई। 2021 वित्तीय वर्ष के अंत तक आंध्र प्रदेश का कुल बकाया कर्ज 3.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक था और यह इस साल 3.98 लाख करोड़ रुपये को पार करने का अनुमान है। आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2020 के अंत तक राज्य के ऊपर 3,07,671.5 करोड़ रुपये का बकाया कर्ज था जो मार्च 2021 तक बढ़कर 3,60,333.4 करोड़ रुपये हो गया। मार्च 2022 तक कर्ज बढ़कर 3,98,903.6 करोड़ रुपये होने की संभावना है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में ये आंकड़े राज्यों के कर्ज के बोझ पर एक सदस्य किशन कपूर द्वारा उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए दिए। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू), विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) और अन्य समकक्ष उपकरण, जहां मूलधन और/या ब्याज राज्य के बजट से चुकाया जाना है, वित्त मंत्रालय के संज्ञान में आए थे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा "इस तरह के उधारों द्वारा राज्यों की शुद्ध उधार क्षमता (एनबीसी) को दरकिनार करने के प्रभाव को देखते हुए, मार्च 2022 में यह निर्णय लिया गया और राज्यों को सूचित किया गया कि राज्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों / निगमों, विशेष प्रयोजन वाहनों (एसपीवी), और अन्य द्वारा उधार लिया गया है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 293(3) के अनुसार जहां मूलधन या ब्याज राज्य के बजट से या करों/उपकर या किसी अन्य राज्य के राजस्व के समनुदेशन द्वारा चुकाया जाना है, सहमति जारी करने के प्रयोजन के लिए राज्य द्वारा स्वयं किए गए उधार के रूप में माना जाएगा।
इसके साथ, केंद्र ने स्पष्ट किया कि यदि किसी एसपीवी या राज्य के पीएसयू की ब्याज या मूल ऋण राशि राज्य के बजट से चुकाई जाती है, तो इसे राज्य सरकार द्वारा ही लिया गया उधार माना जाएगा।
इसके अलावा, वित्त मंत्री ने कहा कि वित्त मंत्रालय का व्यय विभाग भारत के संविधान के अनुच्छेद 293 (3) के तहत राज्यों द्वारा उधार को मंजूरी देने की शक्तियों का प्रयोग करेगा।












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