साल 2014: इन महिलाओं से चमकी भारत की राजनीति
नयी दिल्ली। राजनीति और वो भी भारत में एक ऐसा क्षेत्र रहा है जिसमें महिलाओं की उपस्थिति मात्र उत्सुकता और कौतूहल का विषय हुआ करती थी, लेकिन अब वक्त बदल गया है। इसे भारतीय लोकतंत्र की मज़बूती और उसकी क़ामयाबी ही कही जाएगी कि आज देश की राजनीति की डोर बहुत हद तक कुछ महिलाओं ने थाम रखी हैं। भारत की राजनीति में महिलाओं ने हमेशा से अपना परचम लहराया है। फिर चाहे वो सोनिया गांधी हो, मायावती हो, जयललिता या फिर ममता बैनर्जी। इन जैसी नेताओं की. ये सूची और भी लंबी है।

ताकतवर राजनेता
सोनिया गांधी का मूल्यांकन देश के ताकतवार व्यक्तित्व के तौर पर किया जाता है। कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर सोनिया गांधी सालों ने पार्टी को एकजुट रखने में कामयाब रही हैं। भले ही लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार उसके राजनीतिक करियर पर बदनुमा दाग हो, लेकिन संकट की घड़ी में भी पार्टी को संयुक्त रखने का श्रेष्य सोनिया को जाता है।

सशक्त महिला नेता
25 साल की उम्र में सबसे युवा कैबिनेट मंत्री और किसी राष्ट्रीय पार्टी की पहली महिला प्रवक्ता बनी सुषमा स्वराज को उनके मुखर व्यक्तित्व के लिए जाना जाता है। लोकसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर हर मुद्दे पर अपनी राय रखने वाली सुषमा स्वराज भारत की सबसे शक्तिशाली महिलाओं में से एक हैं। एनडीए की सरकार में उन्हें विदेश मंत्रायल जैसा महत्वपूर्ण विभाग मिला है।

शक्ति प्रदर्शन में सबसे आगे
प्यार से लोग उन्हें 'दीदी' के नाम से बुलाते हैं। ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष हैं। बहुत ही कम उम्र में गरीबों के लिए राजनीति में प्रवेश करने वाली ममता बनर्जी को प्रतिष्ठित 'टाइम' मैगजीन ने सौ सबसे प्रभावशाली भारतीयों में शामिल किया था।

विवादों से रहा नाता
जयललिता दक्षिण भारत खासकर तमिलनाडु में एकमात्र महिला नेता हैं जिनका राजनीति में ज़बर्दस्त प्रभाव है। फ़िल्मी दुनिया से राजनीति में क़दम रखने वाली जयललिता अपने समर्थकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। लेकिन साल 2014 में वो चर्चा में अपनी सजा की वजह से रही।

साल 2014 में फेसबुक पर सबसे ज्यादा लोकप्रिय
राजस्थान में भैरोसिंह शेखावत के निधन और जसवंत सिंह के विवादों में रहने के बाद वसुंधरा राजे राजस्थान में बीजेपी की सशक्त चेहरा बनकर उभरीं। वसुंधरा राजे सिंधिया को राजनीति विरासत में मिली है। साल 2014 उनके लिए खुशियों भरा रहा। विधानसभा चुनाव में जीत के बाद वो राजस्थान की मुख्यंत्री बनीं।

साध्वी में मंत्री तक का सफर
उमा भारती का राजनैतिक सफर छोटी आयु में ही शुरू हो गया था। इसका सबसे बड़ा कारण सिंधिया परिवार से संबंध होना था। उनका जुझारु स्वभाद उन्हें सशक्त महिला नेताओं की श्रेणी में खड़ा करता है। मोदी सरकार में उन्हें जल मंत्रायल का कार्यभार दिया गया है।

सांसद बनने के बाद छोड़ दिया अभिनय
साल 2003 में स्मृति ईरानी ने भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुई थी। राजनीति में आने के बाद उन्होंने अपने अभिन. के करियर से किनारा कर लिया। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी से चुनाव लड़ी और उन्हें कड़ी टक्कर दी। मोदी सरकार में उन्हें मानव संसाधन जैसा महत्वपूण विभाग दिया गया है।

निडर और साहसी नेता
गुजराती भाषा की बेहतरीन वक्ता आनंदीबेन विधानसभा में दमदार नेता के रूप में देखी जाती हैं और विपक्ष पर हमेशा भारी पड़ती हैं। उनकी सबसे बड़ी योग्यता यह है कि वे निडर और साहसी हैं। उनकी इसी व्यक्तित्व के कारण उन्हें गुजरातके मुख्यमंत्री का पद दिया गया।

मॉडल से मिनिस्टर तक
भारतीय राजनीति के सबसे बड़े परिवार यानी गांधी परिवार से होने के बावजूद मेनका गांधी की जिंदगी लो-प्रोफाइल रही है। संजय गांधी से शादी से पहले मेनका मॉडल हुआ करती थीं। पति संजय गांधी के मौत के बाद गांधी परिवार से अगल हुई मेनका ने 1999 में भाजपा ज्वाइंन किया। मोदी सरकार में उन्हें मंत्रीपद दिया गया है।

विरासत में मिली राजनीति
पंकजा मुंडे अपने पिता गोपीनाथ मुंडे की राजनीतिक विरासत को अपने मजबूत कंधों पर लेकर आगे बढ़ रही हैं। पंकजा ने महाराष्ट्र की परली विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर यह साबित कर दिया है कि अपने पिता की जननेता वाली छवि को वह बेहतर ढंग से अपने साथ लेकर चल सकती हैं। पंकजा भारतीय राजनीति में तेजी से उभर रही हैं।












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