कलयुग का श्रवण कुमार , कई महीनों से कर रहा पैदल पैदल यात्रा

कलयुग में ऐसी तस्वीरें शायद ही देखने को मिले। सीतापुर के पवन कुमार ने अपने दादा को चारधाम की यात्रा कराने के लिए खुद को श्रवण कुमार बना लिया। अपने कंधों पर उनका भार उठाकर लगातार 2 महीनों से पैदल चल रह

बरेली। माता-पिता के लिए सच्ची श्रद्धा अब खत्म होती जा रही है, लेकिन सीतापुर के पवन कुमार के एक बार फिर से खुद को कलयुग का श्रवण कुमर साबित किया है। पवन कांवर के एक ओर अपनी स्वर्गवासी दादी की अस्थियां के साथ उनके वजन के बराबर गांव की मिट्टी और दूसरी ओर अपने बाबा को लेकर हरिद्वार सहित चार धामों की यात्रा के लिए पैदल निकल पड़े है। मुस्लिम महिलाओं की एक नई उड़ान, फिट रहने के लिए बहाती है पसीना

 Todays Shravan Kumar

राष्ट्रीय राजमार्ग 24 घंटे नंगे पांव कांवर लेकर जाते ये हैं। पवन कुमार सतयुग के श्रवण कुमार की तरह अपने पूर्वजों की तीर्थ यात्रा की इच्छा पूरी करते हुए अपनी स्वर्गीय दादी की अस्थियां और अपने जीवित दादा बसंत लाल को कांवर में बैठाकर पैदल ही सीतापुर से हरिद्वार चल पड़े हैं। सोमवार को कलयुग के इस श्रवण कुमार ने नाथ नगरी बरेली की सीमा में प्रवेश किया। UP के बरेली से हॉकी के इस स्टार का है गहरा नाता, जीत का गोल दागने पर बंटी मिठाई

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बरेली पहुंचे पवन कुमार ने बताया कि आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण उसके दादा दादी ही नहीं बल्कि परिवार के किसी भी सदस्य ने कोई तीर्थ नहीं किया था। पवन को जब अपने दादा से इस बात की जानकारी हुई तो दादा की इच्छा का सम्मान करते हुए वह अपनी नौकरी छोड़कर कर चार धाम के दर्शन कराने के लिए निकल पड़ा। कांवर में एक ओर अपने दादा बसंत लाल को बैठाकर और दूसरी ओर अपनी स्वर्गीय दादी की अस्थियां और उनके संभावित वजन 87 किलो की मिट्टी रख 2 अक्टूबर को सीतापुर जिले के अपने गांव चॉदपुर से पैदल निकल पड़ा। पवन के पिता, ताऊ, और चाचा भी उनकी तीर्थ यात्रा की इच्छा पूरी करने के लिए उसके साथ चल रहे हैं। पवन हरिद्वार में दादी की अस्थियां विसर्जित करने के बाद, गोला, मिश्ररिख और नैमिशारण्य धाम के दर्शन कराकर डोली को वापस अपने गांव ले जाएंगे।

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पिछले दो महीनों से लगातार पैदल यात्रा कर रहे पवन कुमार लगभग एक साल तक पैदल चलकर चारों धामों की यात्रा कर सकेंगे। पोते के इस संकल्प पर बाबा बसंत लाल उन्हें पूरे दिल से दुआएं दे रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले जन्म के अच्छे कर्मो की वजह से ऐसा पोता मिला है। भारतीय परंपराओं का जीवित उदाहरण बने कलयुग के पितृ भक्त पवन कुमार जहां रूक रहे हैं उनको देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट जा रही है। पुण्य और आस्था के इस सफर में पवन कुमार बहुत आगे निकल चुके हैं। आज लोग उन्हें सतयुग के श्रवण कुमार का पर्याय ही मान रहे हैं।

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