हार से दुखी कांग्रेस, नहीं मनायेगी सोनिया का जन्मदिन

कल घोषित हुए विधानसभा चुनाव में पन्द्रह साल से दिल्ली में काबिज रहने वाली कांग्रेस को राज्य में मात्र 8 सीटें मिली। जबकि 270 सीटों वाले मध्य प्रदेश में 58 और 200 सीटों वाले राजस्थान में मात्र 21 सीटें ही मिली। इसके अलावा छत्तीसगढ़ में स्कूटी और एलसीडी टीवी बांटने जैसी योजनाओं के बावजूद हार का मुंह देखना पड़ा है।
विधानसभा चुनाव परिणामों को लोकसभा चुनाव 2014 का सेमीफाइनल माना जा रहा था, जिसके आधार पर कहा जा सकता है कि भाजपा के लिए अब मुश्किलें आसान हो जाएंगी और चार प्रमुख प्रदेशों में हार के बाद कांग्रेस को बिखरे हुए आत्मविश्वास के साथ लोकसभा चुनाव में उतरना होगा। हालांकि कल अपनी हार को स्वीकार करते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि हमें गहरे आत्ममंथन की जरूरत है, हमे विश्वास है कि हम बदलाव कर सकते हैं और पार्टी में इतनी क्षमता है कि खुद में बदलाव कर सकें।
विधानसभा चुनावों में राहुल और सोनिया ने कांग्रेस के लिए बढ़चढ़कर प्रचार किया लेकिन हार के बाद उन्हें अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा। वहीं राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अब कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी मुश्किल किसी ऐसे व्यक्ति का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए घोषित करना होगा जिस पर विश्वास कर जनता उन्हें वोट कर सके।












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