TMC में भूचाल! कौन हैं Sukhendu Sekhar? जिनके इस्तीफे से मची हलचल, ममता के कहलाते थे संकटमोचक!

Sukhendu Sekhar: पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही हैं, आज उनके बेहद करीबी और पार्टी के संकटमोचक कहे जाने वाले सुखेंदु शेखर रे ने राज्यसभा और पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया, जिससे TMC के साथ उनका लंबे समय से चला आ रहा नाता खत्म हो गया।

अपने इस्तीफ़े में सुखेंदु शेखर ने कहा कि 'पश्चिम बंगाल विधानसभा के हालिया चुनावों में, लोगों ने तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के अराजक शासन को खत्म करने के लिए राज्य के इतिहास में पहली बार भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में भारी जनादेश दिया है।'

Sukhendu Sekhar Roy

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि 'TMC सरकार के कार्यकाल में बड़े पैमाने पर बेलगाम भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ अत्याचार और स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, कानून-व्यवस्था व रोज़गार जैसे क्षेत्रों में बुरी तरह विफलता देखी गई, जबकि नई चुनी गई जन-सरकार ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र के अनुसार पश्चिम बंगाल के सर्वांगीण विकास और पुनर्निर्माण के लिए पहल शुरू कर दी है, इसलिए वे जनता के फैसले को स्वीकार करते हुए पद छोड़ रहे हैं।'

'TMC सरकार के कार्यकाल में बेलगाम भ्रष्टाचार', सुखेंदु शेखर का आरोप

उन्होंने लिखा, 'जनता के इस ऐतिहासिक फैसले का सम्मानपूर्वक स्वीकार करते हुए, मैंने आज राज्यसभा (राज्यों की परिषद) के सदस्य पद और ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।' आपको बता दें कि सुखेंदु शेखर का राजनीतिक सफर अपने आप में काफी दिलचस्प रहा है।

सुखेंदु शेखर का सफरनामा

सुखेंदु शेखर रे का जन्म 5 अप्रैल 1949 को पश्चिम बंगाल में हुआ था। छात्र जीवन से ही उनकी रुचि सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में रही। वे पेशे से वकील भी रहे हैं और कानूनी मामलों की गहरी समझ रखते हैं। इसी कारण राजनीतिक जीवन में भी वे नीति, कानून और संसदीय प्रक्रियाओं के जानकार नेता के रूप में पहचान बनाने में सफल रहे।

तृणमूल कांग्रेस में अहम भूमिका

सुखेंदु शेखर रॉय का राजनीतिक कद उस समय तेजी से बढ़ा जब वे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली All India Trinamool Congress (टीएमसी) से जुड़े। पार्टी के गठन के बाद से ही वे संगठन के महत्वपूर्ण चेहरों में शामिल रहे। उन्हें अक्सर पार्टी की रणनीति तैयार करने, विपक्ष के आरोपों का जवाब देने और संसदीय मामलों को संभालने की जिम्मेदारी दी जाती रही।

सुखेंदु शेखर को पार्टी का "संकटमोचक" कहा जाता था

टीएमसी के भीतर उनकी छवि एक ऐसे नेता की रही है जो सार्वजनिक मंचों पर कम लेकिन संगठनात्मक और संसदीय स्तर पर अधिक सक्रिय रहते हैं। यही वजह है कि उन्हें पार्टी का "संकटमोचक" भी कहा जाता रहा है।

राज्यसभा तक का सफर

साल 2011 में सुखेंदु शेखर पहली बार पश्चिम बंगाल से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए। इसके बाद उन्होंने संसद के उच्च सदन में तृणमूल कांग्रेस का प्रभावी प्रतिनिधित्व किया। राज्यसभा में वे कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते रहे। संसद में उनकी पहचान एक गंभीर और अनुभवी सांसद की रही है। उन्होंने विभिन्न विधेयकों, नीतिगत चर्चाओं और संसदीय बहसों में सक्रिय भागीदारी निभाई, उनका जाना टीएमएसी के लिए बड़ा झटका है।

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