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Tirupati Laddu: तिरुपति लड्डू के 'बीफ चर्बी', TTD की घोर लापरवाही या किसी की शह पर घी कंपनी ने रची साजिश?

Tirupati Laddu row: विश्‍व प्रसिद्ध आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर में प्रसाद के रूप में भक्‍तों को दिए जाने वाले लड्डुओं में 'बीफ चर्बी' होने के खुलासे ने तहलका मचा दिया है। इससे देश ही नहीं दुनिया भर में लाखों भक्तों को गहरा सदमा लगा है। इस घटना ने धार्मिक प्रसाद के प्रति आस्था और मंदिर प्रशासन की ईमानदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लोग जानना चाहते हैं आखिर क्‍या वजह थी कि जो दुनिया के सबसे अमीर भगवान श्री वेंकटेश भगवान के प्रसाद को लेकर तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने ऐसी घोर लापरवाही की और प्रसाद की पवित्रता से इतना "घिनौना" समझौता कर लिया?

Tirupati Laddu row

ये सवाल तिरुपति मंदिर में चढ़ने वाले "प्रसादम" तिरुपति लड्डू के लिए घी सप्‍लाई करने वाली कंपनी के साथ हुए टेंडर की डॉक्‍युमेंट कॉपी की जांच के बाद उठ रहे हैं। दरअसल, घी टेंडर की एक प्रति मिलने के बाद आगे की जांच की गई, जिसमें टेंडर की शर्तों के घोर उल्लंघन पाया और खुलासा हुआ कि घी को जांच के लिए नहीं भेजा गया।

घी कंपनी ने नही दिया NABL सर्टिफिकेट

रिपोर्ट के अनुसार टेंडर के क्लॉज 80 के अनुसार आपूर्ति किए गए घी के प्रत्येक बैच के साथ NABL सर्टिफिकेट और FSSAI से सर्टीफाइड लैब TTD को क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जमा करना अनिवार्य है लेकिन कंपनी ने ऐसा नहीं किया।

नहीं करवाई गई घी की लैब टेस्टिंग?

इसके अलावा क्लॉज 81 के अनुसार TTD को घी के नमूने लैब परीक्षण के लिए भेजने चाहिए लेकिन इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार ऐसा नहीं किया गया।

ये भी पढ़ें- Tirupati Laddu: कैसे और कौन बनाता है तिरुपति लड्डू? क्‍या है भगवान को चढ़ाए जाने वाले 'प्रसादम' का इतिहास?

सवालों के घेरे में TTD

ऐसे में मंदिर प्रशासन संभालने वाली टीटीडी सवालों के घेरे में आ चुकी है। सवाल उठ रहा है कि इतने कड़े नियमों में ऐसी घोर लापरवाही क्‍यों बरती गई? आखिर क्‍यों अगस्त 2023 से जुलाई 2024 के बची घी सप्‍लाई करने वाली तमिलनाडु की कंपनी एआर डेयरी फूड्स के नमूनों में मिलावट की जांच क्‍यों नहीं करवाई गई। आखिर क्‍यों टीटीडी एनएबीएल/लैब परीक्षण के लिए नमूने नहीं भेजे और कंपनी मिलावटी बैच के लिए एनएबीएल प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं दिए।

ये भी पढ़ें-Tirupati Laddu: तिरुपति बालाजी मंदिर में मिलने वाले लड्डू की क्या है कीमत? क्‍यों तीन साइज में बनाए जाते हैं

लापरवाही या साजिश

9 जुलाई, 2024 को एकत्र किए गए इन नमूनों और 16 जुलाई, 2024 की प्रयोगशाला रिपोर्ट ने खरीद प्रक्रिया पर संदेह पैदा कर दिया है और यह भी कि क्या ब्लैक लिस्‍ट में डाली गई कंपनियों को घी का टेंडर देने में जानबूझकर लापरवाही या चूक की गई थी।

घी में मिला बीफ चर्बी और मछली का तेल

बता दें आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबूएडू ने आरोप लगाया है कि वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार ने तिरुपति लड्डू बनाने में जिस घी का इस्‍तेमाल हुआ वो बीफ चर्बी युक्‍त था। इसके अलावा तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने कथित प्रयोगशाला रिपोर्ट पेश की जिसमें लड्डू के लिए इस्तेमाल किए गए घी के नमूनों में "बीफ फैट", "लार्ड" (सूअर की चर्बी से संबंधित) और मछली के तेल की मौजूद होने की पुष्टि की।

टीटीडी ने दी ये सफाई

हालांकि टीटीडी के कार्यकारी अधिकारी (ईओ) ने बताया कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने के अलावा जुर्माना लगाया गया है। उन्‍होंने इन-हाउस लैब की कमी, बाहरी लैब में नमूने भेजने की समस्‍या और अनुचित मूल्य निर्धारण को आपूर्तिकर्ताओं द्वारा शोषण किए जाने समेत अन्‍य कारण गिनाए।

घी सप्‍लाई कंपनी ने क्‍या कहा?

वहीं घोटाले में फंसी तमिलनाडु की कंपनी एआर डेयरी फूड्स ने आरोपों का खंडन किया। कंपनी ने दावा किया कि उसने तिरुपति मंदिर को 0.1% घी भी नहीं दिया था और सभी आपूर्तियां एक प्रतिष्ठित एनएबीएल प्रयोगशाला और एगमार्क प्राधिकरण से प्रमाणन प्राप्त करने के बाद ही की गई थीं।

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