शराब पीकर मरेगी जनता, देखती रहेंगी सरकारें
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। मुंबई में जहरीली शराब ने दर्जनों लोगों को मार डाला। किसी ने ठीक ही कहा कि शराब नशीली होती है पर उससे अधिक ज़हरीली भी होती है । जान भले कुछ दिनों बाद ले परन्तु घर परिवार का सुख चैन सब मार देती है। शराब को भारत में बैन कर देना चाहिए।

भारत में ना जाने कितने होंगे जो बच्चों के दो वक्त की रोटी मारकर शराब पर वह धन खर्च कर देते होंगे। खुद तो नशे में बीवी बच्चों को मारपीट कर सो जाते होंगे पर उन बीवी बच्चों का क्या जिनको भूखे पेट नींद नहीं आती होगी। सरकारें निकम्मी और मक्कार होती हैं ।वह समाज और परिवार के बर्बादी का कारण जो शराब है उसे बंद नहीं करेंगी क्योंकि उनकी कमाई बंद हो जाएगी।
शराब पर बैन
वरिष्ठ चिंतक मोहम्मद जाहिद कहते हैं कि आप महिलाओं का एक सर्वे करा लीजिए 99% महिलाएं शराब पर प्रतिबंध का समर्थन कर देंगी क्योंकि इसकी सबसे अधिक भुक्तभोगी वही होती हैं।
छोड़ा अधर में
महाराष्ट्र में 84 लोग ज़हरीली शराब पीकर मर गये और अपने परिवार को अधर में छोड़ गये, क्या होगा उनके बीवी बच्चों का ? कौन होगा पालने वाला? कौन उनकी शिक्षा और सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाएगा? संभवतः कोई नहीं।
बंद हुए आंदोलन
नशाबंदी के लिए आंदोलन अब बंद हो गये और समाजिक कल्याण करने के नाम पर चुन कर आई सरकारें ही शराब बेचने का ठेका बांटने लगती हैं तो इसका विरोध भी महत्वहीन ही हो जाता है।
जानकार कहते हैं कि जहरीली शराब ही तो भारत में निर्मित विदेशी शराब पर प्रतिबंध नहीं लगने दे रही है। इस तरह से मौत की घटनाएं एक मामला है और शराब पीकर परिवार के बर्बाद होने के मामले इससे कुछ अलग हैं। सरकार विदेशी शराब इसीलिए नहीं बंद कर रही है कि तब लोग नकली, गैर कानूनी जहरीली पीकर मरेंगे। और जहरीली शराब पर कानून होने के बाद भी वह रोक नहीं लगा पा रही है।












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