पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम में उतार-चढ़ाव जारी, इन राज्यों में आंधी-तूफान की आशंका, Alert जारी
नई दिल्ली। नार्थ इंडिया में मौसम में बदलाव लगातार जारी है,भारतीय मौसम विभाग ने अपने ताजा अपडेट में कहा है कि आज दिल्ली में बारिश हो सकती है और शाम तक ठंडी हवाएं भी चल सकती हैं। यही नहीं आईएमडी ने ये भी कहा है कि आज बागपत, शिकारपुर, गुरुमुखेश्वर, सियाना, बुलंदशहर, जहांगीराबाद, खुर्जा, लोनी-देहात, शामली, खेकरा, अलीगढ़, अमरोहा, दादरी, इंदिरापुरम, गलौटी, जट्टारी में भारी बारिश होने की संभावना है इसलिए उसने यहां अलर्ट जारी किया है।

इस वक्त पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है
विभाग ने पहले ही कह रखा था कि इस वक्त पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है इसलिए कई स्थानों पर भारी बारिश और तूफान के आसार हैं इसलिए उसने तीन दिनों के लिए राजस्थान के कोटा, अजमेर, जयपुर, भरतपुर और बीकानेर में आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया था। विभाग ने कहा कि मौसम उतार-चढ़ाव रविवार तक जारी रहेगा। यही नहीं आईएमडी ने कैथल, मेहम, रोहतक, गन्नौर, गोहाना, सोनीपत, खरखौदा, पानीपत में भारी बारिश और ओलावृष्टि की संभावना व्यक्त की है।

दिल्ली की एयरक्वालिटी काफी खराब
विभाग ने कहा है कि दिल्ली में मार्च में अधिकतम तापमान 38 डिग्री तक पहुंच सकता है, तो वहीं प्रदूषण के भी बढ़ने के आसार हैं, आज भी सुबह दिल्ली की एयरक्वालिटी काफी खराब रही है।
दिल्ली में अगले 3 दिन के तापमान का पूर्वानुमान
- रविवार-14 मार्च-तापमान 32 डिग्री
- सोमवार-15 मार्च-तापमान 35 डिग्री
- मंगलवार-16 मार्च-तापमान 35 डिग्री

स्काईमेट ने भी दी चेतावनी
जबकि स्काईमेट ने कहा है कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण मार्च के महीने में पूरी तरह से मौसम का उलट-पलट जारी रहेगा और रूक-रूक कर देश के कई राज्यों में भारी बारिश होती ही रहेगी। विभाग के मुताबिक मैदानी इलाकों में 17 से 18 मार्च के बीच , पहाड़ों पर 15 मार्च से लेकर 18 मार्च तक और मिडिल इंडिया में 18 से 22 मार्च के बीच भारी बारिश की आशंका है और इस दौरान कई जगहों पर बिजली चमक सकती है और ओलावृष्टि की आशंका है। रोहतक, गन्नौर, गोहाना, सोनीपत, खरखौदा, पानीपत , बिहार और झारखंड में आज भारी बारिश की आशंका है।

'मानसून' किसे कहते हैं?
मानसून मूलतः हिंद महासागर एवं अरब सागर की ओर से भारत के दक्षिण-पश्चिम तट पर आनी वाली हवाओं को कहते हैं जो भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि में भारी वर्षा करातीं हैं। ये ऐसी मौसमी पवन होती हैं, जो दक्षिणी एशिया क्षेत्र में जून से सितंबर तक, प्रायः चार माह सक्रिय रहती है। इस शब्द का प्रथम प्रयोग ब्रिटिश भारत में (वर्तमान भारत, पाकिस्तान एवं बांग्लादेश) एवं पड़ोसी देशों के संदर्भ में किया गया था। ये बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से चलने वाली बड़ी मौसमी हवाओं के लिये प्रयोग हुआ था, जो दक्षिण-पश्चिम से चलकर इस क्षेत्र में भारी वर्षाएं लाती थीं। हाइड्रोलोजी में मानसून का व्यापक अर्थ है- कोई भी ऐसी पवन जो किसी क्षेत्र में किसी ऋतु-विशेष में ही अधिकांश वर्षा कराती है।












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