बेंगलुरु पुलिस स्टेशन पर हमले में शामिल होने के लिए तीन लोगों को सात साल की सजा
बेंगलुरु में एक राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने तीन व्यक्तियों को सात साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला 2020 में केजी हल्ली पुलिस स्टेशन पर हुए हिंसक भीड़ के हमले से संबंधित है। दोषियों, सैयद इकरमुद्दीन, सैयद आसिफ और मोहम्मद आतिफ पर घटना में उनकी संलिप्तता के लिए जुर्माना भी लगाया गया है।

12 अगस्त, 2020 को, लगभग 600-800 व्यक्तियों की एक सशस्त्र भीड़ ने केजी हल्ली पुलिस स्टेशन के दरवाजों को तोड़ने का प्रयास किया। भीड़ का इरादा उस व्यक्ति को नुकसान पहुंचाना था जिसने फेसबुक पर पैगंबर मोहम्मद के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां पोस्ट की थीं। पुलिस ने इस कृत्य को रोकने के लिए हस्तक्षेप किया, जिसके कारण प्रदर्शनकारियों द्वारा उन्हें धमकियाँ दी गईं।
दोषियों की भूमिका
तीनों दोषी व्यक्तियों की पहचान सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के समर्थकों के रूप में की गई, जो प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से जुड़ी है। एनआईए के अनुसार, उन्होंने दहशत और घबराहट फैलाने के लिए संगठन के जिला नेताओं के साथ साजिश रची। हमले के दौरान, उन्होंने पुलिस स्टेशन के बाहर वाहनों को आग लगा दी।
एनआईए की जांच
एनआईए ने सितंबर 2020 में स्थानीय अधिकारियों से जांच अपने हाथ में ली। उनके निष्कर्षों से पता चला कि तीनों ने न केवल हमले में भाग लिया था, बल्कि दूसरों को भी इसमें शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया था। सबूतों से पता चला कि उन्होंने एक आतंकवादी कृत्य किया था जिसमें पेट्रोल का उपयोग एक ज्वलनशील पदार्थ के रूप में किया गया था, जिससे सार्वजनिक और निजी संपत्ति को लगभग 14 लाख रुपये का नुकसान हुआ था।
कानूनी कार्यवाही
फरवरी 2021 में आरोपियों पर विधिवत आरोप लगाए गए। जून 2025 तक, उन्होंने उन पर लगाए गए सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया था। इस स्वीकारोक्ति ने एनआईए की विशेष अदालत द्वारा उनकी दोषसिद्धि और बाद में सजा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
With inputs from PTI












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