भारत में फायर सेफ्टी के नाम पर होता है मजाक, साबित करते हैं ये आंकड़ें

नयी दिल्ली। केरल के पुत्तिंगल मंदिर में बीते रविवार को हुए भीषण अग्निकांड की जांच शुरु हो गई है। एक्सप्लोसिव एक्सपर्ट की एक टीम ने घटना स्थल की बारीकी से जांच की है। इस टीम में एक्सप्लोसिव एक्सपर्ट सुदर्शन कमल भी मौजूद थे। इसके अलावा एक खास बात निकल कर सामने आई है और वो ये है कि मंदिर में आतिशबाजी के दौरान सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन किया गया। सुदर्शन कमल ने भी इस बात को माना है।Disturbing Pics- कोलम अग्निकांड के बाद मंदिर का भयावह मंजर

These statistics prove why fire safety in India is a joke

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत रात 10 बजे के बाद आतिशबाजी नहीं की जा सकती है। बात अब अगर भारत के अग्नि सुरक्षा से निबटने के नियम कानूनों की करें तो आंकड़े बेहद शर्मनाक हैं। गृह मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 8500 फायर स्टेशनों में से 2900 की हालत खराब है।

हर साल राज्य स्तर पर पता नहीं कितने सेमिनार और मीटिंग की जाती हैं ताकि इस बात का फैसला लिया जा सके कि अग्नि सुरक्षा को कितना गंभीरता से लिया जा रहा है। हर बैठक में राज्य सरकार एक ही दोष मढ़ते हैं कि और फायर स्टेशन खोला जाए।

खराब उपकरण और फंड की कमी

फायर स्टेशन राज्य सरकार के अंदर आता है। रिपोर्ट की मानें तो कई राज्य ऐसे हैं जिनके पास आग से सुरक्षा के लिए प्रयाप्त उपकरण नहीं हैं। ज्यादातर राज्यों से खराब उपकरणों और फायर स्टेशनों पर फंड की कमी की श्िाकायत आती है।

कल है राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा दिवस

केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार देश में 14 अप्रैल को "राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा दिवस" के रूप में मनाया जाता है। इसके अन्तर्गत लोगों को विभिन्न प्रकार के प्रदर्शनों द्वारा अग्नि से बचाव तथा सावधानी बरतने के संबंध में जागृत किया जाता है।

इसके अलावा अग्निशमन विभाग नागरिकों को अग्निकांड से होने वाली क्षति, अग्निकांड को रोकने एवं इनसे बचाव के उपाय, सुरक्षित मार्ग की व्यवस्था, अग्निशामक उपकरणों का प्रयोग, उद्योगों में अग्नि सुरक्षा व सावधानियां, विद्युत अग्नि सुरक्षा व सावधानी, बहुमंजिले भवनों में अग्नि सुरक्षा आदि के प्रति भी जागरूक करता है।

नियमों की अनदेखी

पटाखों पर पूरी तरह से बैन कर पाना कठिन है लेकिन नियमों का अगर अनेदखा ना किया जाए तो शायद हादसे रोके जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत रात 10 बजे के बाद आतिशबाजी नहीं की जा सकती है। उसके बावजूद भी पुत्तिंगल मंदिर में देर रात तीन बजे आतिशबाजी की गई। यहां निश्चित तौर पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन किया गया।

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