नहीं रहीं बंगाल की दिग्गज थियेटर आर्टिस्ट उषा गांगुली, हार्ट अटैक से हुई मौत, कानपुर से था ये खास कनेक्शन
Theatre personality Usha Ganguli passes awayविख्यात रंगकर्मी उषा गांगुली का आज सुबह 7.30 कोलकाता में निधन हो गया।
कोलकाता। बंगाल की दिग्गज थियेटर आर्टिस्ट उषा गांगुली का गुरुवार को दक्षिण कोलकाता स्थित उनके घर में निधन हो गया। विख्यात रंगकर्मी उषा गांगुली की उम्र 75 वर्ष थीं। उनकी आज सुबह 7.30 कोलकाता में निधन हो गया। आज तड़के नींद में ही उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके परिवार ने बताया कि कोलकाता शहर के लेक गार्डेन्स इलाके में स्थित अपने फ्लैट में वह गुरुवार को सुबह सात बजे उनके घर काम करने वाली महिला को बेहोश अवस्था में मिलीं। जिसके बाद उसने पड़ोसियों को इसकी जानकारी दी, क्योंकि ऊषा गांगूली अपने फ्लैट में अकेली रहती थीं। उनके साथ उनके परिवार का कोई व्यक्ति नहीं रहता था।

तीन दिन पहले उनके भाई की हुई थी मौत
पड़ोसियों ने डॉक्टर को बुलाया गया, डाक्टरों ने चेकअप करने के बाद बताया कि उनकी कुछ समय पहले दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई थी। बता दें ऊषा गांगुली का एक बेटा भी है, लेकिन वह फ्लैट में अकेली रहती थी। उनके पति कमलेन्दु की कुछ साल पहले मौत हो चुकी है। तीन दिन पहले ही गांगुली के भाई का भी निधन हो गया था।

कानपुर में हुआ था जन्म
75 वर्ष के रंगकर्मी उषा गांगुली का जन्म 1945 में उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ था। उषा गांगुली के निधन से पूरा रंगजगत स्तब्ध है। उषा गांगुली रंगकर्म से जुड़ी हुई थी। उन्होंने कोलकाता स्थित श्री शिक्षायतन कॉलेज से स्नातक किया था। बाद में उन्होंने कोलकाता को अपना कार्यक्षेत्र बनाया, कोलकाता जहां बंगाली थियेटर का बोलबाला था वहां उन्होंने हिंदी थियेटर को स्थापित किया।

उषा गांगुली ने बहुत से नाटकों की प्रस्तुति दी
उषा गांगुली ने बहुत से नाटकों की प्रस्तुति दी जिनमें काशी का अस्सी, महाभोज, रुदाली, कोर्ट मार्शल और अंतरकथा ये सब रायपुर सहित देशभर में हो चुके हैं। काशीनाथ सिंह के उपन्यास पर आधारित उनका बहुचर्चित नाटक काशी का अस्सी बहुत चर्चित रहा, पूरे देश में इसका मंचन हुआ। अन्तरकथा उनका एकल नाटक था। उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार - रंगमंच - निर्देशन से सम्मानित भी किया गया।

नारी स्वतंत्रता और समानता का नाम उषा गांगुली
उषा गांगुली ने कोलकाता में हिंदी नाटक खेले तो बांग्ला नाटक भी। रंगमंच के जरिए बांग्ला-हिंदी सेतुबंधन में अहम भूमिका अदा करनेवाली उषा गांगुली को जानने का अवसर उन्हीं की रंग प्रस्तुति 'अंतर्यात्रा' देती है। यह नाटक उनका आत्मकथांश है। उनके निजी और रंगजीवन में जो स्त्रियां आई, भी इसमें हैं। दूर खड़ी है पुरुष के प्रेम के द्वंद्व में फंसी 'बीना'। आत्म सम्मान से जीने के लिए घर से बाहर आई 'मुनिया'। राजनीतिक विप्लव की साकार छवि बन गई गोर्की की मां '। गाड़ी के बोझ को अकेले खींच रही - 'हिम्मतमाई'। साहसी सावित्री। 'रुदाली' की सनीचरी, जिसका पेशा है - अमीरों के मुर्दों पर रोकर पैसा कमाना। उषा गांगुली निर्देशित-अभिनीत 'अंतर्यात्रा' सिर्फ नाटक नहीं, बाहर-भीतर के जंग से निरंतर जूझती स्त्री की संघर्ष गाथा है।












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