खतरे की घंटी! अरुणाचल में कामेंग नदी का पानी अचानक हुआ काला, जानिए एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं ?
ईटानगर, 1 नवंबर: चार दिन हो गए अरुणाचल प्रदेश में कामेंग नदी का पानी पूरी तरह से काला है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि इसके पीछे कामेंग की सहायक नदियों में से एक नदी में हुई भूस्खलन की घटना है। पानी में कीचड़ भरा है और मछलियों और जलीय जीवों को भारी नुकसान पहुंचा है। राज्य सरकार इसके कारणों का पता लगाने के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमिटी बना चुकी है। लेकिन, एक्सपर्ट मान रहे हैं कि कामेंग नदी में जो कुछ भी हुआ है, वह किसी आने वाली बहुत बड़ी तबाही का संकेत है, जिसके पीछे जलवायु परिवर्तन है।

कामेंग नदी का पानी अचानक हुआ काला
भूस्खलन की वजह से लाखों टन कीचड़ और चट्टान कामेंग नदी में आ गए हैं, जिससे नदी का प्रवाह काफी कम हो गया है। पूर्वी कामेंग जिले में इसका पानी उफनती नदी के बजाय कीचड़ भरे दलदल में तब्दील हो चुका है। कामेंग नदी अरुणाचल के पूर्वी कामेंग जिले में बर्फीले गोरी चेन पहाड़ के नीचे हिमनद झील से निकलती है और यह ब्रह्मपुत्र नदी की एक सहायक नदी है। पूर्वी कामेंग के जिलाधिकारी प्राविममल अभिषेक पोलुमातला ने कहा है कि कई जगहों पर टेस्ट के बाद पता चला है कि नदी के पाने में घुले हुए पदार्थों की मात्रा बहुत ही ज्यादा है, जबकि ऑक्सीजन की मात्रा बहुत ही कम हो चुकी है। उनके मुताबिक बड़ी संख्या में मछलियों और बाकी जल जीवों की मौत का यही कारण होने का अनुमान है।

कामेंग नदी के साथ क्या हुआ ?
जिलाधिकारी के मुताबिक 'चार दिन बाद भी हालात जस के तस हैं। ज्यादा कीचड़ की वजह से मैलापन और ऑक्सीजन का स्तर कमोबेश समान है। प्रथम दृष्टया हमें लगता है कि नदी के ऊपरी क्षेत्र में भूस्खलन के कारण यह हुआ है।' इस बीच पर्यावरणविद् हिमांशु ठक्कर ने दि न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा है कि वहां पर हिमनद झील भी हैं। अभी तक यही इसके पीछे का कारण लग रहा है। उन्होंने कहा, 'उस क्षेत्र में कोई बड़ा भूकंप नहीं हुआ है। अक्टूबर के महीने में भी अरुणाचल में कुछ बारिश हुई है। ऊंचाई वाले स्थानों में बर्फबारी के साथ हुई बारिश की वजह से भूस्खलन की स्थिति या हिमनद जैसे विस्फोट की स्थिति पैदा हो सकती है।' उनका कहना है कि यह बात काफी चौंकाने वाली है कि नदी में अभी भी कीचड़ है। इसे अब तक खत्म हो जाना चाहिए।

भविष्य के लिए है खतरे की घंटी !
एक्सपर्ट के अनुसार हिमनद के क्षेत्र में बहुत बड़ी मात्रा में मोरैन (हिमोढ़) मलबा भी जमा है। इसलिए जब कभी भूस्खलन होता है या हिमनद फटने जैसी घटना होती है तो बहुत बड़ी मात्रा में मलबा नीचे आता है। उनके मुताबिक इसका यही वजह लगता है। वो बोले, 'निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए बहुत सारी स्टडी की जरूरत है, लेकिन मोटे तौर पर यह जलवायु परिवर्तन से जुड़ा मसला लगता है। अक्टूबर में इस तरह की बारिश, उसके बाद बर्फबारी, अरुणाचल के सामान्य नहीं है।' अगर एक्सपर्ट की आशंका सही है तो भविष्य के लिए यह बहुत बड़े खतरे का संकेत है।

कामेंग नदी की मछली के इस्तेमाल और बिक्री पर रोक
बहरहाल, पूर्वी कामेंग जिला प्रशासन ने सीआरपीसी की धारा 144 लगाकर लोगों को नदी से मछली पकड़ने या दूसरे कार्यों पर रोक लगा दी है। क्योंकि, नदी में अत्यधिक गाद की वजह से लोग आसानी से डूब भी सकते हैं। यही नहीं इस नदी की मछली को बेचने और इस्तेमाल पर भी दो हफ्तों के लिए पाबंदी लगा दी गई है, क्योंकि इससे फूड प्वाइजनिंग होने की आशंका है। प्रशासन ने नदी किनारे पुलिसकर्मियों को गश्ती पर लगा दिया है और लोगों से भी अपील की है कि वह दूसरे लोगों को इससे दूर रहने को कहें। कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि 20-30 साल पहले भी ऐसी घटना देखने को मिली थी। (तस्वीरें- अरुणाचल टाइम्स के ट्विटर वीडियो से)












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