ऑक्सीजन: आखिर क्यों भारत में हो रही 'संजीवनी' की कमी? जानिए इसका बड़ा कारण
नई दिल्ली, 25 अप्रैल। कोरोना वायरस की दूसरी लहर की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के कई राज्यों में अस्पताल बेड और ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं। हालात इतने बुरे हैं कि मरीजों के परिजनों को खुद ऑक्सीजन सिलेंडर का इंतजाम करना पड़ रहा है। शनिवार को दिल्ली के जयपुर गोल्डन अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के चलते 22 मरीजों ने दम तोड़ दिया। महामारी के प्रकोप में यह बड़ा सवाल है कि आखिर देश में ऑक्सीजन कमी की नौबत आई क्यों। आखिर क्या वजह है जो अस्पताल ऑक्सीजन की कमी की वजह से मरीजों को बचा नहीं पा रहे हैं?

गौरलतब है कि कोरोना वायरस ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, देश में प्रतिदिन सामने आ रहे कोविड मरीजों की संख्या अब 4 लाख के करीब बहुंच गई, वहीं रोजाना 700 से अधिक मौतें हो रही हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या के चलते पिछले 10 दिनों में ऑक्सीजन की मांग में 76 फीसदी की वृद्धि आई है। आपको बता दें कि वर्तमान में भारत की कुल ऑक्सीजन प्रोडक्शन की कैपेसिटी 7127 मैट्रिक टन है। 12 अप्रैल, 2021 तक देश 3842 मैट्रिक टन ऑक्सीजन का उपयोग करता था जबकि 22 अप्रैल तक उपयोगिता 6785 मैट्रिक टन तक पहुंच गई।
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बता दें कि वर्तमान ऑक्सीजन उत्पादन दैनिक ऑक्सीजन की आवश्यकता से काफी अधिक है। 2019 तक देश में महामारी फैलने से पहले, भारत को सिर्फ 750-800 एमटी तरल चिकित्सा ऑक्सीजन (एलएमओ) की आवश्यकता थी, बाकी औद्योगिक उपयोग के लिए उपयोग किया जाता था। हालांकि कोरोना वायरस की दूसरी लहर के चलते देश में ऑक्सीजन उत्पादन का सारा इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवा में किया जा रहा है, 18 अप्रैल से औद्योगिक आपूर्ति पूरी तरह से बाधित हो गई है। मेडिकल ऑक्सीजन का परिवहन भी अस्पतालों में इस 'संजीवनी' की कमी का एक कारण है। देश में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन कंटेनर्स नहीं होने की वजह से उत्पादन क्षेत्र से अस्पताल तक गैस के परिवहन में समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी आकंड़ों के मुताबिक भारत में सड़क परिवहन के लिए सिर्फ 1,172 ऑक्सीजन क्रायोजेनिक टैंकर हैं।












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