जगन्नाथ रथयात्रा की मांग करने वाला मुस्लिम शख़्स कौन?

जगन्नाथ रथयात्रा की मांग करने वाला मुस्लिम शख़्स कौन?

कोरोना वायरस संक्रमण के ख़तरे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 18 जून को फ़ैसला देते हुए भगवान जगन्नाथ की सदियों पुरानी वार्षिक रथयात्रा पर रोक लगा दी थी.

लेकिन कई पुनर्विचार याचिकाओं की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ पुरी की ऐतिहासिक रथ यात्रा को मंज़ूरी दे दी.

वैसे तो रथ यात्रा पर रोक लगाने के फ़ैसले पर सुप्रीम कोर्ट में कई पुनर्विचार याचिकाएँ दायर की गई थी, लेकिन सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियाँ बटोरी भगवान जगन्नाथ के मुसलमान भक्त आफ़ताब हुसैन ने.

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में दायर दो याचिकाओं में कहा था कि भगवान जगन्नाथ की सदियों पुरानी परंपरा को बंद नहीं किया जाना चाहिए.

जगन्नाथ रथयात्रा की मांग करने वाला मुस्लिम शख़्स कौन?

आफ़ताब हुसैन 19 साल के हैं और नयागढ़ ऑटोनोमस कॉलेज में इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन कर रहे हैं.

उनकी मां रशीदा बेग़म, पिता इमदाद हुसैन और छोटे भाई अनमोल के साथ वो ईटामाटी गाँव में रहते हैं.

आफ़ताब के नाना मुलताब ख़ान रामायण और दूसरे हिंदू ग्रंथों की चर्चा करते थे. उन्होंने एक मंदिर की प्रतिष्ठा भी करवाई थी.

आफ़ताब के घर में भी भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा होती है. वह जगन्नाथ संस्कृति से जुड़े अनेक पुस्तकों का अध्ययन कर चुके हैं.

आफ़ताब ने बीबीसी को बताया "हिंदू देवताओं की पूजा करने को लेकर उन्हें या उनके परिवार को मुस्लिम समुदाय की ओर से कभी किसी तरह का विरोध नहीं झेलना पड़ा."

जगन्नाथ रथयात्रा की मांग करने वाला मुस्लिम शख़्स कौन?

उन्होंने कहा, "जाति और धर्म से पहले मैं एक उड़िया हूँ. जगन्नाथ ओडीशा के गण देवता हैं. भगवान जगन्नाथ ओडीशा की पहचान हैं. रथयात्रा बंद होने की ख़बर से मुझे दुख हुआ था. मुझे लगा कि मुझे सुप्रीम कोर्ट से पुनर्विचार करने का अनुरोध करना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने जब रथयात्रा की अनुमति दी तो मुझे जो ख़ुशी हुई वो में शब्दों में बयां नहीं कर सकता."

जगन्नाथ रथयात्रा की लगातार मांग करने वाले देव प्रसाद परिजा ने बीबीसी को बताया "आफ़ताब को मैं दूसरा सालबेग मानता हूँ."

सालबेग एक प्रसिद्ध उड़िया कवि हैं, जो भगवान जगन्नाथ को समर्पित बहुत सारे भजन की रचना और गायन के लिए जाने जाते हैं.

सालबेग एक मुस्लिम परिवार से थे और भगवान जगन्नाथ के प्रति उनकी भक्ति इतनी अधिक थी कि उन्हें अब भगवान जगन्नाथ के सबसे बड़े अनुयायियों में से एक माना जाता है. उनकी मृत्यु के बाद, उनके शरीर को मंदिर के पास दफ़नाया गया था और उसे सालबेग समाधि पीठ के नाम से जाना जाता है.

आफ़ताब बताते हैं, "मैं कभी किसी मंदिर में नहीं गया क्योंकि मुझे इसकी अनुमति नहीं है लेकिन मैं अपने घर में जगन्नाथ जी की पूजा करता हूँ."

जगन्नाथ रथयात्रा की मांग करने वाला मुस्लिम शख़्स कौन?

आफ़ताब आठ साल से अपने इलाक़े में रथयात्रा का आयोजन कर रहे हैं और दो बार पुरी रथयात्रा में भी जा चुके हैं. हालांकि इस बार सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए वे अपने घर में बैठकर टीवी से ही रथयात्रा देख रहे हैं.

ये पूछे जाने पर कि बाक़ी मुसलमान उनकी इस श्रद्धा के बारे में क्या सोचते है, आफ़ताब कहते हैं, "इस्लाम ईश्वर को एक मानता है और हिंदू धर्म के जगतगुरु शंकराचार्य भी कहते हैं कि ब्रह्म एक है. इसकी समझ रखने वाला भला क्यों विरोध करेगा?"

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