इंदौर-पटना एक्सप्रेस हादसा: जरूरत से अधिक भरी हुई थी ट्रेन
सूत्रों का दावा है कि ट्रेन में सैकड़ों लोग या तो बिना टिकट के यात्रा कर रहे थे या फिर जनरल टिकट पर यात्रा कर रहे थे, जो रेलवे के आंकड़ों में नहीं दिखाए गए हैं।
इंदौर। जहां एक ओर रेलवे दावा कर रहा है कि कानपुर के पास पुखरायां में दुर्घटनाग्रस्त हुई इंदौर-पटना एक्सप्रेस में 1200 लोग यात्रा कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर अगर सूत्रों की मानें तो ट्रेन में यात्रियों की संख्या इससे कहीं अधिक थी। सूत्रों का दावा है कि ट्रेन में सैकड़ों लोग या तो बिना टिकट के यात्रा कर रहे थे या फिर जनरल टिकट पर यात्रा कर रहे थे, जो रेलवे के आंकड़ों में नहीं दिखाए गए हैं, क्योंकि उनकी गिनती की ही नहीं जाती है।

एक रेलवे अधिकारी के अनुसार इस तरह के लोगों की संख्या ट्रेन में करीब 500 तक हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि यह संख्या ट्रेन की क्षमता का तकरीबन आधा है।
इसका एक उदाहरण हैं राजा राम, जो रविवार को इंदौर रेलवे स्टेशन पर अपनी साली को ढूंढ़ रहे थे। वह जानते थे कि वह इस ट्रेन में चढ़ी थी, लेकिन यह नहीं जानते थे कि उसकी सीट का नंबर क्या है, न ही ये जानते थे कि वह किस कोच में चढ़ी थी। ऐसा इसलिए क्योंकि उसके पास ट्रेन का वेटिंग लिस्ट का टिकट था।
राजा राम ऐसे अकेले शख्स नहीं हैं जिनके पहचान को कोई शख्स उस ट्रेन में अनऑथराइज टिकट के साथ था। एक रेलवे अधिकारी के अनुसार ऐसे बहुत से लोग अपने पहचान के किसी शख्स की पूछताछ करने आए थे, जो अनऑथराइज टिकट के साथ यात्रा कर रहे थे और ट्रेन में यात्रा कर रहे थे। इससे यह साफ होता है कि ट्रेन में यात्रा करने वालों की संख्या रिजर्वेशन प्राप्त किए गए लोगों कि संख्या से बहुत अधिक थी।
इतना ही नहीं, रेलवे स्टेशन पर दुकान लगाने वाले लोगों ने भी यह दावा किया कि शनिवार को अन्य दिनों की अपेक्षा उस ट्रेन में काफी अधिक भीड़ थी। रेलवे ने उस ट्रेन में कुछ अतिरिक्त कोच भी लगाए थे, लेकिन वह भी आवश्यकता के हिसाब से पर्याप्त नहीं थे। एक दुकान वाले ने बताया कि जनरल बोगी में लोग लाइन लगाकर चढ़ रहे थे और उनकी संख्या सीटों की संख्या से कहीं अधिक थी।












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