तेलंगाना ने केआरएमबी को लिखा पत्र- आंध्र को अनधिकृत वेलिगोंडा परियोजना को रोकने का किया आग्रह
कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (केआरएमबी) से तेलंगाना ने आंध्र प्रदेश को 'अनधिकृत' वेलिगोंडा परियोजना को निष्पादित करने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही नए घटकों को जोड़ने से रोकने का अनुरोध किया है। इसका उद्देश्य बेसिन के बाहर पानी को मोड़ना है।

तेलंगाना सिंचाई और कमान क्षेत्र विकास के इंजीनियर-इन-चीफ (जनरल), सी मुरलीधर ने केआरएमबी बोर्ड को भेजे गए पत्र में ने लिखा है कि ईनाडु में यह बताया गया था कि आंध्र प्रदेश सरकार ने दो लिफ्ट योजनाओं के लिए प्रशासनिक मंजूरी प्रदान की थी। तेलंगान ने केआरएमबी से बोर्ड द्वारा किसी भी मूल्यांकन और शीर्ष परिषद की मंजूरी के बिना कृष्णा नदी के जल को बेसिन के बाहर मोड़कर वोलिगोंडा प्रोजेक्ट, घटकों और विस्तार का निर्माण करने से आंध्र प्रदेश को रोकने का अनुरोध किया है।
बता दें तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव ने अवैध और अनधिकृत पानी के बहाव का विरोध किया था और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र शेखावत से श्रीशैलम जलाशय के जरिए कृष्णा नदी के जल को मोड़ने से रोकने लिए तुरंत कार्रवाई करने का अनुरोध किया था।
वहीं परिषद की एक मीटिंग में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पानी का अंतर-बेसिन हस्तांतरण केवल इन-बेसिन की जरूरतों को पूरा करने के बाद ही किया जा सकता है।बता दें जनवरी 2021 में कंद्रीय मंत्री ने एक पत्र लिखकर आंध्र प्रदेश को नई परियोजनाओं के पुरस्कार, निर्माण और कार्यान्वयन की किसी भी गतिविधि को तब तक आगे नहीं बढ़ाने का आदेश दिया था जब तक शीर्ष परिषद द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) का मूल्यांकन और केआरएमबी द्वारा अनुमोदन नहीं कर लिया जाता। इस आदेश के बावजूद आंध्र प्रदेश जल शक्ति मंत्रालय के निर्देशों की अनदेखी करते हुए उक्त कार्यो को अंजाम देने में जुटी हुई है।
गौरतलब है कि कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण-I (KWDT-I) ने कृष्णा जल को नदी बेसिन के बाहर मोड़ने के मुद्दे पर( निर्णय लिया कि बेसिन के अंदर के उपयोग को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए। इसलिए वेलिगोंडा सहित अधिशेष-आधारित परियोजनाओं को शुरू करना, तेलंगाना की परियोजनाओं के हितों के लिए हानिकारक होगा याद रहे नागार्जुन सागर परियोजना श्रीशैलम परियोजना और हैदराबाद की पीने के पानी की पूर्ति करती है।












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