'हेट स्पीच' वाले टी राजा सिंह तेलंगाना में क्यों बन गए बीजेपी की मजबूरी?
तेलंगाना में बीजेपी ने जिस तरह से अपने निलंबित एमएलए टी राजा सिंह को पार्टी में वापस लिया है और फिर से उन्हें हैदराबाद की गोशामहल से ही टिकट दिया है, उसको लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
टी राजा सिंह का पार्टी में फिर से स्वागत किए जाने का मतलब है कि नूपुर शर्मा और नवीन कुमार जिंदल की वापसी का भी रास्ता साफ होना। शुरू में चर्चा थी कि तेलंगाना का प्रदेश नेतृत्व तो चाहता है कि टी राजा सिंह का निलंबन खत्म हो, लेकिन पार्टी की सेंट्रल लीडरशिप में इसको लेकर हिचकिचाहट है।

टी राजा सिंह के जवाब से संतुष्ट होकर बीजेपी ने निलंबन रद्द किया
रविवार को उनका निलंबन खत्म किए जाने को लेकर पार्टी ने यही तर्क दिया है कि पार्टी ने उनके जवाब से संतुष्ट होकर ही यह फैसला किया है। पार्टी ने फौरन ही उन्हें गोशामहल सीट से ही टिकट देने की घोषणा भी कर दी है। राजा सिंह 2014 से लगातार वहां से पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
इससे पहले उन्होंने कहा था कि पार्टी अगर उनका निलंबन वापस नहीं लेती है, तो भी वे बीजेपी को समर्थन करते रहेंगे। लेकिन, गोशामहल के मतदाताओं की 'मांग' को देखते हुए उनके निर्दलीय चुनाव लड़ने की भी संभावना बनी हुई थी। राजा सिंह ने पार्टी के कारण बताओ नोटिस के जवाब में कहा था कि उन्होंने बीजेपी के संविधान का उल्लंघन नहीं किया।
राजा सिंह के वीडियो और टिप्पणियों से बवाल मचा था
दरअसल, पिछले साल 23 अगस्त को उन्होंने सोशल मीडिया पर कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी के हैदराबाद वाले शो को लेकर एक वीडियो शेयर किया था, जिसको लेकर बहुत बवाल खडा हो गया था। कथित तौर पर उसमें उन्होंने पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ टिप्पणियां की थीं। ये वही दौर था, जब टीवी चैनलों पर भाजपा के नेताओं नूपुर शर्मा और नवीन कुमार जिंदल की ओर से पैगंबर के खिलाफ कथित टिप्पणियों की वजह से बीजेपी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निशाने पर थी। खासकर मध्य-पूर्व के देशों से इसका भारी विरोध हो रहा था।
टी राजा सिंह के सक्रिय रहते तेलंगाना में मजबूत हो रही थी बीजेपी
लेकिन, तथ्य ये है कि जब टी राजा सिंह तेलंगाना में आक्रामक भाषणों के जरिए भाजपा के लिए भीड़ खींचते थे, तब यही पार्टी सत्ताधारी बीआरएस के मुकाबले मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में नजर आने लगी थी। प्रदेश में और खासकर हैदराबाद में ज्यादा मुस्लिम आबादी होने की वजह से बीजेपी की स्थिति मजबूत होती नजर आ रही थी।
टी राजा सिंह के निलंबन के बाद कांग्रेस को बढ़त मिलने लगी
लेकिन, जब भाजपा ने पैगंबर वाले विवाद में टी राजा सिंह को निलंबित किया और हैदराबाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया तो भाजपा की बढ़त वाला ग्राफ गिरता हुआ नजर आने लगा। जो कांग्रेस तेलंगाना में जमीन पर दिखाई नहीं दे रही थी, उसे अचानक बढ़त मिलनी शुरू हो गई।
ओपनियन पोल के नतीजों ने प्रदेश नेतृत्व के कान खड़े कर दिए
जब मौजूदा तेलंगाना विधानसभा चुनावों को लेकर कई ओपिनियन पोल के नतीजे आए और कांग्रेस को भारत राष्ट्र समिति के मुकाबले कांटे की टक्कर में दिखाया जाने लगा तो बीजेपी के प्रदेश नेतृत्व के कान खड़े होने शुरू हो गए। इन चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में बीजेपी को तीसरे नंबर पर भी बहुत दूर दिखाया जाने लगा।
ऐसी स्थिति में बीजेपी के प्रदेश नेतृत्व के बीच यह बात चर्चा का विषय बन गया कि अब शायद टी राजा सिंह से दूरी बनाकर रखने में पार्टी का कल्याण नहीं है। यहीं से दिल्ली तक संदेश पहुंचना शुरू हुआ और आखिरकार पार्टी को एहसास हुआ कि टी राजा सिंह को वापस लेने से शायद उसे फायदा भी हो सकता है, बाहर रहने से किसी तरह के लाभ की उम्मीद नहीं है।
टी राजा सिंह ने भाजपा को क्या जवाब दिया?
जहां तक बीजेपी की अनुशासन समिति की बात है तो उसे भेजे जवाब में टी राजा सिंह ने साफ कहा था कि उन्होंने तो सिर्फ फारूकी को निशाना बनाया था और किसी भी धर्म की आलोचना नहीं की थी।
उनके जवाब में कहा गया, 'फारूकी के शो के बाद मैंने लोगों को समझाने के लिए एक वीडियो बनाया कि मुनव्वर फारूकी अपना शो कैसे करता है। मैंने अपने वीडियो में न तो किसी धर्म के खिलाफ गलत बातें कही हैं और न ही किसी धर्म के देवताओं की आलोचना की है। मैंने अभद्र या कठोर भाषा का भी इस्तेमाल नहीं किया है और ना ही किसी व्यक्ति का नाम लिया है। मैंने अपने वीडियो में केवल मुनव्वर फारुकी की नकल की, वह भी गूगल की जानकारी के आधार पर.....'
कौन हैं बीजेपी एमएलए टी राजा सिंह?
46 वर्षीय टी राजा सिंह हैदराबाद की गोशामहल सीट से दो बार के विधायक हैं। 2018 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी राज्य में अपनी पांच सीटिंग सीटों में से सिर्फ यही सीट जीती थी, जब वहां टीआरएस की लहर चल रही थी।
राजनीति में आने से पहले राजा सिंह बजरंग दल के सदस्य थे और निगम पार्षद के तौर पर टीडीपी से राजनीति की शुरुआत की। 2014 के आम चुनावों से पहले वे बीजेपी में शामिल हुए और गोशामहल सीट कांग्रेस से छीन ली।
राजा सिंह के मुताबिक उनके पूर्वज दशकों पहले हैदराबाद में स्थापित हो गए और देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाने लगे। 2020 के सितंबर में फेसबुक ने कंपनी की नीतियों के उलंघन के नाम पर उन्हें अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन कर दिया था।
वैसे हैदराबाद और आसपास के इलाकों में राजा सिंह ने अपनी लोकप्रियता मूल रूप से 'गौ रक्षक' के रूप में कायम की है और उनका दावा है कि वे और उनके समर्थक हैदराबाद में अबतक हजारों गायों को 'कसाइयों' से बचा चुके हैं।
जून 2019 में पुलिस लाठीचार्ज में उनके सिर में गंभीर चोटें लगी थीं। तब वे अपने समर्थकों के साथ स्वतंत्रता सेनानी रानी अवंती बाई लोध की प्रतिमा स्थापित करने की कोशिश की थी, जिसको लेकर पुलिस का कहना था कि उसकी इजाजत नहीं दी गई थी।












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