तेलंगाना: अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए आवंटित अधिकांश बजट शादी मुबारक, इफ्तार पार्टियों पर किया गया खर्च
एसोसिएशन फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक एम्पावरमेंट ऑफ द मार्जिनलाइज्ड (एएसईईएम) और एक्शन एड द्वारा राज्य-स्तरीय परामर्श स्टडी चल रही है। इसके तहत की गई स्टडी में खुलासा हुआ है कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों से राज्य में अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए तेलंगाना अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से मिलने वाला अधिकांश बजट शादी मुबारक योजना, इफ्तार और क्रिसमस दावत जैसी लोकलुभावनी योजनाओं पर खर्च किया गया है। गरीबों को सीधे लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं पर खर्च बहुत कम हो रहा है।

रविवार को एएसईईएम और एक्शन एड ने अपनी ये स्डडी रिपोर्ट सार्वजनिक की जिसके दावा किया गया कि जिस वर्ग के लिए बजट आवंटित किया गया था उन पर बजट नहीं खर्च किया गया। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को एससी और बीसी कल्याण विभागों के लिए आवंटित बजट के बराबर उप-योजना का दर्जा दिया जाए।
असीम ने ये रिपेार्ट शेयर करते हुए बताया तेलंगाना में मुसलमानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का अध्ययन करने के लिए 2016 में सुधीर समिति की स्थापना की गई। इसके बाद कई उपायों और कार्यक्रमों की घोषणा की जिसने अल्पसंख्यक समाज को दिशा लेकिन बीते 7-8 साला में तेलंगाना अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कामकाज में बहुत कुछ नहीं बदला है।
असीम ने बताया प्दिल तीन साल में तेलंगाना में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का बजट का उपयोग दर कम ही नजर आई। - 2020-21 में 56.6 प्रतिशत, 2021-22 में 80.43प्रतिशत और 2022-23 में 72.74प्रतिशत ही खर्च किया गयज्ञ। वहीं जब बजट किन मदों में खर्च किया गया तो स्टडी में खुलासा हुआ कि शादी मुबारक योजना और इफ्तार और क्रिसमस दावत जैसी लोकलुभावन योजनाओं पर पैसा अधिक खर्च किया गया है।
जैसे प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति का बजट 2018-19 में 9.5 प्रतिशत से घटाकर 2022-23 में 0 प्रतिशत कर दिया गया। इसके अलावा, बैंक से जुड़ी सब्सिडी और प्रशिक्षण एवं रोजगार जैसी योजनाओं के लिए बजट आवंटन में भी भारी गिरावट कर दी गई। वहीं स्टडी सर्कल कोचिंग के लिए बजट 2018-19 में 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 2022-23 में 52 प्रतिशत कर दिया गया।
बता दें तेलंगाना में मुसलमानों की संख्या 14.57 प्रतिशत और अनुसूचित जाति की आबादी 17.48 प्रतिशत है, इन समुदायो के बजट में भारी अंतर पाया गया। स्टडी में खुलासा हुआ एससी कल्याण विभाग को राज्य के कुल बजट का 9.04 फीसदी मिलता है वहीं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को केवल 0.83 प्रतिशत बजट मिलता है।
इस रिपोर्ट के आधार पर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के लिए आवंटित बजट को एससी और बीसी कल्याण विभागों के लिए आवंटित बजट के समान उप-योजना का दर्जा दिया जाए।
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