Telangana Election Result: तेलंगाना में क्यों हार कर भी हुई बीजेपी की जीत?
Telangana election results 2023: तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी बहुमत के आंकड़े से बहुत दूर है। वहां त्रिशंकु विधानसभा की भी स्थिति नहीं बनी है। फिर भी बीजेपी को बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगती दिख रही है।
तेलंगाना में बीजेपी को विधानसभा की119 में से 8 सीटें मिली हैं, जो राज्य में अबतक उसकी सबसे ज्यादा सीटें हैं। 2018 में पार्टी सिर्फ 1 सीट जीती थी और वह भी गोशामहल की सीट है, जहां से अबकी बार भी पार्टी प्रत्याशी टी राजा सिंह ने लगातार तीसरी जीत दर्ज की है।

1 से 8 हुई सीट, दोगुना हुआ वोट शेयर
2018 में भारतीय जनता पार्टी को तेलंगाना में करीब 7% वोट मिले थे। 2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव में पार्टी का वोट शेयर करीब दो गुना या 14% हो गया है।
भाजपा को तेलंगाना में सबसे बड़ी सफलता तो कामारेड्डी सीट पर मिली है। यहां पार्टी के प्रत्याशी वेंकट रमण रेड्डी ने मौजूदा मुख्यमंत्री और बीआरएस चीफ के चंद्रशेखर राव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पार्टी के संभावित सीएम पद के दावेदार रेवंत रेड्डी दोनों को हरा दिया है।
बीजेपी उम्मीदवार ने इस सीट पर केसीआर को 6,741 वोटों से हराया है, जो कि भाजपा के लिए भी बहुत बड़ी जीत है। कांग्रेस के रेवंत रेड्डी यहां तीसरे स्थान पर रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी को 2014 के विधानसभा चुनाव में संयुक्त आंध्र प्रदेश के दौरान तेलंगाना में 5 सीटें जरूर मिली थी। लेकिन, तब पार्टी की टीडीपी के साथ गठबंधन थी। लेकिन, अबकी बार पार्टी का राज्य में किसी बड़े दल से तालमेल नहीं हुआ था।
भाजपा ने इस चुनाव को वहां मुख्य तौर पर तीन चीजों को मुद्दा बनाकर लड़ा है। पार्टी ने राज्य में चुनाव जीतने पर पिछड़े वर्ग (BC) के नेता को ही मुख्यमंत्री बनाने का वादा किया था।
इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य की सबसे बड़ी दलित जाति मडिगा से वादा किया है कि राज्य में अनुसूचित जाति (SC) के आरक्षण में इनके लिए कोटा निर्धारित की जाएगी।
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐलान के आधार पर केंद्रीय कैबिनेट ने सममक्का-सरक्का केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की मंजूरी दी है। यह आदिवासी विश्वविद्यालय तेलंगाना के मुलुगू में 900 करोड़ की लागत से बनाया जाना है।
तेलंगाना में लोकसभा की 17 सीटें हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने राज्य में 4 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया था। ऐसे में विधानसभा चुनावों में 8 सीटें जीतने के बाद आने वाले लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा का मनोबल बढ़ गया है।
इससे पहले ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव में भी भाजपा ने अपनी बड़ी उपस्थिति दर्ज की थी। दक्षिण भारत में कर्नाटक और पुडुचेरी ही है, जहां भाजपा का आधार जम चुका है। जबकि, तेलंगाना, केरल और तमिलनाडु में वह लगातार जनाधार बढ़ाने में जुटी हुई है।
ऐसे में तीन हिंदी भाषी राज्यों में बड़ी जीत के साथ ही तेलंगाना की हार भी बीजेपी के लिए जीत की तरह है। क्योंकि, यही वो पार्टी है, जो 1984 के लोकसभा चुनावों में सिर्फ 2 सीटें जीती थी; और वहां से शुरू होकर 2019 में 303 सीटों तक पहुंच चुकी है और पिछले साढ़े 9 वर्षों से देश में पूर्ण बहुमत वाली मजबूत सरकार चली रही है।












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