Telangana Assembly Elections 2018: 24 घंटे के भीतर तेलंगाना में बदल गया भाजपा का सुर
हैदराबाद। तेलंगाना में सरकार बनाने को लेकर अभी से तमाम राजनीतिक दलों के बीच उठापटक शुरू हो गई है। नतीजे आने से पहले भाजपा ने टीआरएस को अपना समर्थन देने के संकेत दे दिए हैं। मतदान खत्म होने के 24 घंटे के भीतर ही टीआरएस को लेकर भाजपा के रुख में बदलाव देखने को मिल रहा है। गौर करने वाली बात है कि चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने के चंद्रशेखर राव पर निशाना साधते हुए कहा था कि यह परिवार की पार्टी है और उनकी सरकार भ्रष्ट है। लेकिन अब नतीजों से पहले भाजपा के सुर बदलते दिख रहे हैं।
कांग्रेस-AIMIM को समर्थन नहीं
तेलंगाना में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के लक्ष्मण ने कहा कि अगर 11 दिसंबर को नतीजे घोषित होने के बाद किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता है तो वह टीआरएस का समर्थन करने के लिए तैयार है। हालांकि भाजपा ने इसके लिए एक शर्त भी रखी है। भाजपा का कहना है कि अगर टीआरएस चाहती है कि हम उसका समर्थन करें तो उसे असदुद्दी ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम से दूरी बनानी होगी। लक्ष्मण ने कहा किहमारी पार्टी ऐसे दल का समर्थन करना चाहती है तो जो कांग्रेस और एमआईएमआईएम के साथ ना हो।

भाजपा के बिना नहीं सरकार
लक्ष्मण ने कहा कि तेलंगाना ने भाजपा के बिना सरकार नहीं बन सकती है। अगर जनता ने किसी भी एक दल को पूर्ण बहुमत नहीं दिया है तो हम सरकार का हिस्सा होंगे। हम कांग्रेस और एआईएमआईएम को समर्थन नहीं देंगे, लेकिन अन्य विपक्षी दलों के साथ हमारे विकल्प खुले हैं। इसपर फैसले शीर्ष नेताओ के साथ सलाह के बाद लिया जाएगा।

ओवैसी ने किया था टीआरएस के लिए प्रचार
हालांकि टीआरएस सऔर एआईएमआईएम ने आधिकारिक रूप से कोई गठबंधन नहीं किया है, लेकिन दोनों ने खुले रूप से एक दूसरे के बीच दोस्ताना संबंध की बात मानी थी। ओवैसी ने टीआरएस उम्मीदवार के लिए मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में प्रचार भी किया था। उन्होंने कहा था कि चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद के चंद्रशेखर राव एक बार फिर से प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे। शुक्रवार को एग्जिट पोल के नतीजे आने के बाद तीन एग्जिट पोल ने टीआरएस को पूर्ण बहुमत दिया था। लेकिन एक एग्जिट पोल में टीआरएस को 48-60 सीटें ही मिलती दिख रही थी। आपको बता दें कि प्रदेश में कुल 119 विधानसभा सीटें हैं।

क्या हुआ था 2014 में
आपको बता दें कि 2014 में भाजपा के खाते में कुल 45 सीटें आई थी, लेकिन उस वक्त तेलंगाना अलग नहीं हुआ था और भाजपा ने टीडीपी से गठबंधन किया था। लेकिन इस बार भाजपा ने अकेले ही चुनाव लड़ा है और 118 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि एक सीट युव तेलंगाना पार्टी को दी है। एग्जिट पोल में भाजपा को 5-7 सीटें मिलती दिख रही हैं, जबकि भाजपा को खुद इस बात की उम्मीद है कि उसे 10-12 सीटें मिल सकती हैं। माना जा रहा है कि त्रिशंकु विधानसभा होती है तो भाजपा सरकार बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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