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केंद्र की NEP को ठुकराकर तमिलनाडु ने पेश की अपनी राह, लागू की स्वतंत्र राज्य शिक्षा नीति, कितना अलग है SEP?

Tamil Nadu State Education Policy: तमिलनाडु में शिक्षा को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने अपनी स्वतंत्र राज्य शिक्षा नीति (State Education Policy) लागू कर दी है। अन्ना शताब्दी पुस्तकालय सभागार में सीएम स्टालिन ने इस नीति का औपचारिक विमोचन किया गया। नई नीति का मकसद राज्य की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक समावेशी, छात्र-केंद्रित और तकनीकी रूप से समृद्ध बनाना है। इसमें परीक्षा प्रणाली से लेकर स्कूल स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों की पढ़ाई तक कई बड़े बदलाव शामिल हैं।

इस नई शिक्षा नीति का एलान उस समय हुआ है जब राज्य और केंद्र सरकार के बीच भाषा नीति को लेकर लंबे समय से टकराव जारी है। तमिलनाडु की नीति ने साफ कर दिया है कि राज्य अपने दो-भाषा फार्मूले तमिल और अंग्रेज़ी पर ही कायम रहेगा।

Tamil Nadu State Education Policy

SEP में क्या है खास?

तमिलनाडु की राज्य शिक्षा नीति (State Education Policy - SEP) को सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश डी. मुरुगेसन की अध्यक्षता में गठित एक 14-सदस्यीय समिति ने तैयार किया था। यह रिपोर्ट पिछले साल सरकार को सौंप दी गई थी। इस नीति में विज्ञान और तकनीकी शिक्षा को प्राथमिकता दी गई है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों को स्कूल स्तर पर शामिल करने की सिफारिश की गई है।

एसईपी में अंग्रेजी भाषा में दक्षता बढ़ाने पर भी खास ज़ोर है, ताकि छात्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पीछे न रहें। इसके साथ-साथ, नीति का मूल उद्देश्य यह है कि राज्य के हर छात्र तक समान, गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा पहुंचे। शिक्षा को ज्यादा सुलभ, व्यावहारिक और तनाव-मुक्त बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

केंद्र की तीन-भाषा नीति को अस्वीकार किया गया

तमिलनाडु की नई राज्य शिक्षा नीति में केंद्र सरकार की तीन-भाषा नीति को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया गया है। नीति में दो-भाषा फॉर्मूले तमिल और अंग्रेज़ी को ही जारी रखने का निर्णय लिया गया है। यह फैसला राज्य की भाषा पहचान और सांस्कृतिक आत्मनिर्भरता को संरक्षित करने की दिशा में एक सशक्त संदेश माना जा रहा है। वर्षों से तमिलनाडु में हिंदी थोपे जाने के विरोध में आवाज़ उठती रही है, और इस नीति ने उस रुख को औपचारिक रूप से नीति दस्तावेज़ में स्थान दिया है। केंद्र द्वारा प्रस्तावित तीन-भाषा फार्मूले को भाषा विविधता और संविधान की संघीय भावना के खिलाफ मानते हुए, तमिलनाडु सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी एक भाषा को बाध्यकारी रूप से लागू करना देश की भाषाई अस्मिता के लिए घातक हो सकता है।

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मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा

राज्य शिक्षा नीति (एसईपी) में मातृभाषा तमिल को शिक्षा का मूल माध्यम बनाए रखने पर विशेष ज़ोर दिया गया है। नीति का स्पष्ट मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा यदि बच्चों को उनकी मूल भाषा में दी जाए, तो न केवल उनकी समझ बेहतर होती है, बल्कि वे सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी अधिक जुड़ाव महसूस करते हैं। तमिलनाडु लंबे समय से मातृभाषा आधारित शिक्षा का समर्थक रहा है, और नई नीति इस दिशा में एक ठोस कदम के रूप में देखी जा रही है।

परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव

तमिलनाडु की नई राज्य शिक्षा नीति में परीक्षा प्रणाली को लेकर बड़े और क्रांतिकारी बदलाव किए गए हैं। सबसे अहम फैसला यह है कि अब राज्य के आर्ट्स और साइंस कॉलेजों में दाखिले के लिए किसी भी प्रकार की प्रवेश परीक्षा (Entrance Exam) नहीं ली जाएगी। इसके स्थान पर कक्षा 11वीं और 12वीं के अंकों को ही प्रवेश का आधार बनाया जाएगा, जिससे छात्रों पर अतिरिक्त परीक्षा का बोझ कम होगा। इसके अलावा, नीति में ओपन-बुक एग्जाम की व्यवस्था को लागू करने की बात कही गई है, ताकि छात्रों में रटने की बजाय समझ और विश्लेषण की क्षमता विकसित हो। साथ ही, लगातार और व्यापक मूल्यांकन प्रणाली (CCE) को बढ़ावा दिया गया है, जो बच्चों के सीखने के हर चरण का आकलन करती है और परीक्षा के दबाव को कम करती है। ये बदलाव राज्य की शिक्षा प्रणाली को कम तनावपूर्ण, अधिक व्यवहारिक और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं।

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