Tamil Nadu: कैसे 3 करोड़ से ज्यादा महिला वोटरों को साधने में जुटे सीएम स्टालिन? पुरुषों से ज्यादा है संख्या

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने शुक्रवार यानी 15 सितंबर, 2023 को महिलाओं के लिए एक खास कल्याणकारी योजना लागू की है। 'कलैगनार मगलिर उरीमाई थोगई थित्तम योजना' की शुरुआत राज्य में सत्ताधारी डीएमके के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री सीएन अन्नादुरई की जयंती के मौके पर कांचीपुरम से की गई है।

'कलैगनार मगलिर उरीमाई थोगई थित्तम योजना' के तहत राज्य सरकार तमिलनाडु की 1.06 करोड़ महिला प्रमुखों को हर महीने 1,000 रुपए की वित्तीय सहायता देगी। 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले शुरू हुई इस योजना के लिए राज्य सरकार ने 7,000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं।

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तमिलनाडु में पुरुष से ज्यादा हैं महिला वोटर
अगर इस योजना को प्रदेश की चुनावी राजनीति से जोड़कर देखें तो यह डीएमके गठबंधन सरकारी के लिए फिर से जिताऊ फॉर्मूला साबित हो सकता है। क्योंकि, इस साल जनवरी में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी मतदाता सूची के मुताबिक 6.20 करोड़ से ज्यादा वोटरो में महिला वोटरों की संख्या 3.15 करोड़ से अधिक और पुरुषों की 3.04 करोड़ से ज्यादा थी। वहीं ट्रासजेंडर वोटर भी 8 हजार से अधिक की तादाद में थे, जिन्हें भी इस योजना के लाभार्थियों में शामिल किया गया है।

2021 में महिलाओं के 5,68,580 वोट ज्यादा पड़े थे
तमिलाडु में महिला वोटर क्यों अहम हैं, इसके लिए 2021 में हुए राज्य विधानसभा चुनाव में वोटिंग के आंकड़ों पर गौर करना पड़ेगा। हालांकि, कुल पुरुष मतदाताओं के वोट प्रतिशत के मुकाबले कुल महिलाओं का वोट प्रतिशत तुलनात्मक रूप से थोड़ा कम रहा था।

लेकिन, फिर भी पिछले विधानसभा चुनावों में पुरुष वोटरों के मुकाबले महिलाओं के 5,68,580 वोट ज्यादा पड़े थे। यानी अगर इनका वोट प्रतिशत बढ़ा तो ये चुनाव परिणाम को एकतरफा करने में भी सक्षम साबित हो सकती हैं।

महिला वोटरों की प्रतिबद्धता जीत या हार तय कर सकती है
महिला वोटर पुरुषों की तुलना में किसी भी पार्टी या राजनेता के प्रति ज्यादा प्रतिबद्ध रहती हैं, ये बात बिहार और यूपी जैसे राज्यों में भले ही अधिक नजर आने लगा है। लेकिन, दक्षिण भारतीय राज्यों खासकर तमिलनाडु में वोटिंग का यह ट्रेंड काफी पुराना है।

डीएमके सरकार की अधिकतर महिलाओं को योजना के दायरे में लाने की रणनीति
अब हम ये देख लें कि डीएमके सरकार ने किस तरह से अधिकतर महिला आबादी को इस योजना के दायरे में लाने की रणनीति तैयार की है। 'कलैगनार मगलिर उरीमाई थोगई थित्तम योजना' के लिए वे सारी महिलाएं और ट्रांसजेंडर आवेदन कर सकती हैं, जिनकी उम्र 21 वर्ष या अधिक है। इसमें वे अविवाहित और विधवा महिलाएं भी शामिल हैं, जो अपने परिवारों की मुखिया हैं।

वे सारी महिलाएं इस योजना की लाभार्थी बनने की हकदार होंगी, जिनकी सालाना आय 2.5 लाख रुपए से कम हो। वे महिलाएं भी लाभार्थी बनेंगी जिनके पास 10 एकड़ से कम शुष्क भूमि (dry land )या 5 एकड़ से कम आद्र भूमि (wetland) हो। इसके अलावा इन परिवारों की सालाना बिजली खपत भी 3,600 यूनिट से कम होनी चाहिए। इस तरह से राज्य की अधिकांश महिला वोटरों को इस योजना के दायरे में लाने की कोशिश की जा रही है।

पिछले चुनाव में क्या हुआ था?
अगर हम पिछले विधानसभा चुनावों के नतीजों पर गौर करें और सिर्फ दो प्रमुख पार्टियों सत्ताधारी डीएमके और विपक्षी एआईएडीएम की परफॉर्मेंस को देखें तो महिला वोटरों का थोड़ा रुझान भी इधर-उधर होने से नतीजों पर बहुत ज्यादा असर पड़ने की संभावना बन सकती है।

तब कुल 234 सीटों में से एआईएडीएमके 191 सीटों पर लड़कर 33.29% वोट लाकर 66 सीटे ही जीत सकी थी। जबकि, उसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी डीएमके 188 सीटों पर ही लड़कर 37.7% वोट के साथ 133 सीटें जीत गई थी। बाकी सीटों पर दोनों दलों की सहयोगी पार्टियां लड़ी थीं।

लोकसभा चुनावों के लिहाज से देखें तो तमिलनाडु में दक्षिण भारत की सबसे ज्यादा 39 सीटें हैं। मतलब, यूपी, महाराष्ट्र और बिहार के बाद इसका स्थान है। 2019 में डीएमके को 33.526% वोट मिले थे और वह 24 सीटें जीती थी। जबकि, उसकी विरोधी एआईएडीएमके 19.3905% वोट लाकर सिर्फ 1 ही सीट जीत सकी थी।

मतलब, डीएमके का गणित पूरी तरह से सेट है। अगर महिला वोटरों पर इस योजना का जादू चल गया तो पिछले लोकसभा चुनावों वाला नतीजा फिर से प्राप्त कर सकती है।

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