Tamil Nadu Chunav Result: एक्ट्रेस और भाजपा उपाध्यक्ष Khushboo Sundar के पति हारे या जीते?
Tamil Nadu Election Results: तमिलनाडु चुनाव में सुपरस्टार विजय थलपति, गौतमी, आर. सरतकुमार और उदयनिधि स्टालिन के अलावा फेमस एक्ट्रेस खुशबू सुंदर के पति सुंदर सी. मुदरै सेंट्रल से चुनाव लड़े। फिल्मों में अपनी एक्टिंग से लोगों का दिल जीतने वाली खूशबू सुंदर ने अपने पति सुंदर की जीत के लिए और जनता का समर्थन पाने के लिए जमकर प्रचार किया था।
थियागा राजन का निर्वाचन क्षेत्र मदुरै मीनाक्षी मंदिर के लिए जाना जाता है और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की संभावना के कारण चर्चा में था, खासकर थिरुपरंकुंडरम में हाल के मंदिर-दरगाह विवाद के बाद। भाजपा ने अभिनेता खुशबू के पति सी. सुंदर को उतारा था।

खुशबू सुंदर के पति सी सुुंदर हारे या जीते?
लेकिन TVK के नए मुस्लिम उम्मीदवार मदहर बदरुद्दीन ने खुशुबू सुंदर के पति सी सुंदर को हरा कर जीत दर्ज की है। यह जीत TVK की धर्मनिरपेक्ष साख को प्रमाण है, ऐसे चुनाव में जहांलोगों ने 'बदलाव' के लिए मतदान किया।
खुशबू सुंदर कांग्रेस छोड़ भाजपा में हुई थीं शामिल
फेमस एक्ट्रेस खुशबू सुंदर भाजपा से पहले कांग्रेस में थी और 2020 में राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से हटाए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। दक्षिण भारत में कांग्रेस का प्रमुख चेहरा रहीं खुशबू सुंदर ने तब खूब सुर्खियां बटोरी थी।राजनीति में कदम रखने के बावजूद खुशबू ने अभिनय जारी रखा। हाल ही में वे अनिल कपूर के साथ 'सुबेदार' में दिखीं। वे सक्रिय फिल्म प्रोड्यूसर भी हैं।
खुशबू सुंदर का जन्म 29 सितंबर 1970 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने वर्ष 2000 में फिल्म निर्देशक सुंदर सी से विवाह किया। उनकी दो बेटियां, अवंतिका और आनंदिता हैं, जिनके नाम पर 'अवनी सिनेमैक्स' नामक प्रोडक्शन हाउस स्थापित है। वह पिछले 34 वर्षों से चेन्नई में निवास कर रही हैं।
थलपति विजय ने स्टालिन को सत्ता से किया बेदखल
तमिल सिनेमा के सुपरस्टार विजय अपनी फिल्मों के विजयी नायक की तरह ही राजनीति में भी उभरे हैं। अपने पहले ही चुनाव में उन्होंने प्रतिद्वंद्वियों को परास्त किया। उनकी पार्टी, तमिल वेत्री कझगम (TVK), ने सत्ताधारी DMK-नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) और AIADMK-नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस को करारी शिकस्त दी।
अपनी सीट भी हार गए स्टालिन
मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन भी विजय की लहर से अछूते नहीं रहे। वे अपनी परंपरागत कोलथुर सीट से हार गए, जहां से वे पिछले तीन चुनावों में आसानी से जीतते रहे थे। उन्हें एक पूर्व DMK कार्यकर्ता ने हराया, जो इस साल DMK छोड़ TVK में शामिल हुए थे।
युवाओं, महिलाओं, अल्पसंख्यकों, दलितों के वोटों और DMK सरकार के खिलाफ मजबूत सत्ता-विरोधी लहर ने विजय की ऐतिहासिक जीत सुनिश्चित की। यह तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास में एक दुर्लभ बदलाव है, जैसा 1967 में DMK द्वारा कांग्रेस और 1977 में AIADMK द्वारा DMK की हार में देखा गया था।













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