क्यों स्वामी प्रसाद मौर्या नहीं बन सकते BJP से सीएम कैंडिडेट !

लखनऊ। कभी मायावती खेमे के साथ भाजपा पर विरोधी सुर तेज करने वाले स्वामी प्रसाद मौर्या ने सोमवार को भाजपा की सदस्यता ले ली। इसी के साथ तमाम सवाल, संभावनाएं, आवश्यकताओं के हवाले से 'स्वामी को भाजपा की ओर से सीएम कैंडिडेट बनाया जा सकता है' जैसी खबरें मीडिया, सोशल मीडिया पर हेडलाइन बनाकर बारी-बारी से उतारी जाने लगीं।

सवर्ण को भला कैसे नजरंदाज करे 'भाजपा'

सबसे पहली वजह तो यही है कि भारतीय जनता पार्टी ने आगामी 2017 विधानसभा चुनावों के मद्देनजर आंकलन के इतर प्रदेश अध्यक्ष के नाम का चुनाव किया है। कहीं न कहीं इसके कारण भारतीय जनता पार्टी के सवर्ण और प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं में दबी छिपी नाराजगी है। हालांकि इसे उजागर करके वे अपने लिए मुसीबत नहीं खड़ी करना चाहेंगे। जिस कारण वे मीडिया से शेयर करना भी उचित नहीं समझते।

सवर्ण वोट बैंक खिसक सकता है

लेकिन गर स्वामी प्रसाद मौर्या को सीएम कैंडिडेट बनाया जाता है तो सीधे तौर पर नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। और बीजेपी का अपना यानि की सवर्ण वोटबैंक उसके खाते से खिसक सकता है। प्रदेश में सवर्ण मतदाता 18 प्रतिशत हैं। वहीं कुर्मी जाति के 6 प्रतिशत मतदाता हैं। ऐसे में सवर्ण मतदाता को नजरंदाज करना भाजपा के लिए शायद ही संभव हो।

जहरीले बयान से कहीं भाजपा को न हो जाए नुकसान !

कांग्रेस की यूपी से सीएम पद की उम्मीदवार शीला दीक्षित को रिजेक्टेड माल बताने वाले स्वामी प्रसाद मौर्या भी बयानवीर की श्रंखला में अव्वल नंबर पर काबिज हैं। फरवरी 2016 में मीडिया को दिए इंटरव्यू में स्वामी ने इसी भाजपा जिसके अब वे सदस्य हैं को मुसलमानों के लिए खतरनाक बताया था। साथ ही नेता प्रतिपक्ष रहते हुए स्वामी ने पडरौना क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित करते हुए सनातन धर्म पर प्रहार किया था।

सनातन धर्म पर प्रहार

उन्होंने भाषण के दौरान हिंदुओं को सुअर ( भगवान विष्ण का वाराह अवतार) और गोबर से बने गौरी गणेश की पूजा करने वाला कह दिया था। जिसके बाद स्वामी का जबरजस्त विरोध हुआ था। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी किसी भी कीमत पर ऐसा व्यक्ति उत्तर प्रदेश के मुखिया की उम्मीदवारी के लिए खड़ा करना मुनासिब नहीं समझेगी, जिसकी वजह से समूची पार्टी की फजीहत हो।

भाजपा के भीतर ही हो जाएगा बिखराव

इन दोनों वजहों के इतर एक कारण यह भी है कि भारतीय जनता पार्टी के साथ लंबे वक्त से जुड़े रहे लोग, जिनकी लोकप्रियता भी है और उन्होंने पार्टी के लिए हमेशा तटस्थता के साथ काम किया है उन्हें अनदेखा करना और जुमां जुमां आए स्वामी को इतनी बड़ी जिम्मेवारी देना असंतोष की आग की खातिर चिंगारी देने जैसा है।

सीएम कैंडिडेट के नाम पर तमाम चर्चाएं

काफी लंबे वक्त से बीजेपी में सीएम कैंडिडेट के नाम पर तमाम चर्चाएं होती आ रही हैं। जिसमें योगी के नाम पर कहीं न कहीं बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई संकेत भी दे चुके हैं।

योगी के चलते स्वामी की राह आसान नहीं

साथ ही मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए आरएसएस द्वारा योगी के नाम को सर्वसम्मति के सात आगे बढ़ाने की खबरें भी सामने आयी हैं। हालांकि इसका यह मतलब बिलकुल भी नहीं कि योगी का नाम भाजपा फाइनल कर चुकी है। लेकिन स्वामी के नाम पर सीएम कैंडिडेट की मुहर....भाजपा के समर्पित नेताओं समेत समर्थकों से हाथ धोने जैसा ही है।

सारी बातें भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व पर निर्भर

कमोबेश सारी बातें भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व पर निर्भर है। देखना दिलचस्प होगा कि अब वे किस रणनीति के तहत यूपी में अपनी सियासत को आगे बढ़ाते हैं।

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