12 सांसदों के निलंबन पर बोले केंद्रीय मंत्री-सभी सांसदों को व्यक्तिगत रूप से माफी मांगनी चाहिए
नई दिल्ली, 29 नवंबर: राज्य सभा में हंगामा करने वाले 12 सासंदों के निलंबन पर विरोधी दलों के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि हमने प्रस्ताव पारित कर 12 सांसदों को निलंबित किया है। मॉनसून सत्र के शुरुआत से ही विपक्ष का रवैया सत्र को न चलने देने का था। हमारी विपक्षी पार्टियों से उनके इस व्यवहार को लेकर चर्चा भी हुई थी। हमें विपक्ष ने ऐसा व्यवहार फिर से न होने का आश्वासन दिया था। नायडू को लिखे पत्र में जोशी ने पिछले सत्र में हुए घटनाक्रम का विस्तृत उल्लेख किया और कहा कि इन सदस्यों का व्यवहार 'गैरकानूनी, आपराधिक और अपमानजनक' था।
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प्रहलाद जोशी ने कहा कि, लेकिन 11 अगस्त को फिर से वैसा ही व्यवहार देखने को मिला। 11 अगस्त को सत्र का आखिरी दिन होने की वजह से उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं हुई। हमें आज अवसर मिला और जिन सांसदों ने पिछले सत्र में बदतमीजी की उनके ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित किया। उन्होंने कहा कि, विपक्ष उग्र था, उन्होंने मानसून सत्र की शुरुआत में भी पीएम को मंत्रियों का परिचय नहीं देने दिया। डोला सेन (टीएमसी सांसद) ने शांता छेत्री (टीएमसी सांसद) की गर्दन पर फांसी का फंदा लगाया। वे सीटी बजाते थे, अनुचित व्यवहार करते थे, और टेबल पर चढ़ जाते थे।
उन्होंने कहा कि, हंगामे के मामले पर जांच करने , सजा का निर्धारण करने और भविष्य में इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को होने से रोकने के लिए ही सरकार ने कमेटी बनाने का सुझाव दिया था लेकिन विरोधी दलों ने यह मौका गंवा दिया। इन 12 सासंदों के निलंबन की वापसी के बारे में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार हर तरह के प्रस्ताव के लिए तैयार है लेकिन हंगामा करने वाले इन सभी सांसदों को व्यक्तिगत रूप से माफी मांगनी चाहिए।
प्रह्लाद जोशी ने आगे कहा कि, पीयूष गोयल और मैंने उनसे बार-बार अनुरोध किया कि यदि वे खेद व्यक्त करते हैं और कहते हैं कि चैंबर के सामने ऐसा दोबारा नहीं होगा तो हम इस अध्याय को बंद करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्होंने फिर भी इनकार कर दिया। हम ऐसा नहीं चाहते थे, लेकिन चैंबर की गरिमा को ध्यान में रखते हुए हमारे पास और कोई विकल्प नहीं था।












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