सर्जिकल स्ट्राइक के बाद कितना सुधर गया है पाकिस्तान, सरकार ने दिए संसद में सुबूत
सर्जिकल स्ट्राइक से तीन माह पहले जम्मू कश्मीर में 110 आतंकी हमलों में सुरक्षाबलों के 34 जवान शहीद हुए जो वहीं सात नागरिकों की मौत भी हुई थी। लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक के बाद इसमें कमी आई है।
नई दिल्ली। केंद्र सरकार की ओर से दावा किया गया है कि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान की ओर से युद्धविराम तोड़े जाने और उनकी वजह से एलओसी और इंटरनेशनल बॉर्डर (आईबी) पर मौतों की संख्या में कमी आई है। सरकार ने बुधवार को लोकसभा में यह जानकारी दी।

सर्जिकल स्ट्राइक से पहले और बाद के हालात
गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर की ओर से एक लिखित जवाब में कहा गया कि सितंबर 29 को जब सर्जिकल स्ट्राइक हुई तो उससे तीन माह पहले जम्मू कश्मीर में 110 आतंकी हमले हुए थे। इन हमलों में सुरक्षाबलों के 34 जवान शहीद हुए
जो वहीं सात नागरिकों की मौत भी हो गई थी। सितंबर में जब उरी आतंकी हमले के बाद इंडियन आर्मी ने सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया तो कई लोगों ने इस पर कई तरह के सवाल उठाए थे। कहीं न कहीं अब सरकार के दावे इस बात के सुबूत हैं कि सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया गया था। सर्जिकल स्ट्राइक से पहले पाकिस्तान की ओर से हर दिन युद्धविराम तोड़ा जाता था। एलओसी पर जहां 228 बार युद्धविराम तोड़ा गया तो वहीं आईबी पर करीब 221 घटनाएं दर्ज हुई। वहीं सर्जिकल स्ट्राइक के बाद एलओसी पर 22 और आईबी पर छह बार युद्धविराम तोड़ा गया।
भारत की ओर से गया कड़ा संदेश
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद तीन माह के अंदर 87 आतंकी वारदातें हुईं जिनमें सुरक्षाबलों के 19 जवान शहीद हुए तो छह नागरिकों की मौत हुई। सितंबर से दिसंबर तक जब सर्दियों का समय शुरू हो जाता है तो उस समय पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ के कई प्रयास किए जाते हैं। लेकिन इस बार बॉर्डर के आसपास के इलाके बर्फ की वजह से ब्लॉक हो गए थे तो इस वजह से घुसपैठ की संख्या में कमी आई। वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक सर्जिकल स्ट्राइक ने पाकिस्तान को एक कड़ा संदेश देने का प्रयास किया है। पाकिस्तान को अब यह बात बखूबी मालूम हो गई है कि भारत सीमा पार से जारी आतंकवाद और युद्धविराम उल्लंघन को हल्के में नहीं लेगा। लंबे समय तक भारत शांत रहा है लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक ने साफ कर दिया है कि भारत शांत नहीं बैठेगा। इसके अलावा पाक की ओर से जारी हरकतों में कमी आने की एक वजह जनरल राहील शरीफ का बतौर सेना प्रमुख रिटायर होना भी है। जनरल शरीफ भारत के खिलाफ अपने व्यक्तिगत द्वेष को आगे बढ़ा रहे थे।












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