पति से अलग रह रही महिला को ससुराल के घर में मिले हक, SC कर रहा है विचार

नई दिल्ली। शादी के बाद ससुराल में पति के घर पर क्या महिला का अधिकार होता है, इस बाबत दायर याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट बुधवार को तैयार हो गया है। दरअसल इस बाबत एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी कि अगर महिला का पति उसे छोड़ दे तो क्या महिला का पति के घर पर अधिकार होता है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच इस याचिका पर सुनवाई करेगी, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस सएनवी रमना करेंगे। बेंच में जस्टिस अजय रोहातगी भी शामिल हैं।

केंद्र को नोटिस जारी

केंद्र को नोटिस जारी

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस बाबत केंद्र सरकार को नोटिस जारी करके पूछा है कि क्या महिला को घरेलू हिंसा से बचाने के लिए उसे पति के घर पर अधिकार दिया जा सकता है। यह याचिका मुस्लिम महिला ने दायर की है, जिसे उसके पति ने 2004 में छोड़ दिया था और सुसराल वालों ने महिला को घर से बाहर निकाल दिया था। तीन बच्चों की मां याचिकाकर्ता शबनम अहमद ने दावा किया है कि उनके पति शादी के बाद यूके चले गए और 15 वर्ष से वापस नहीं लौटे। महिला का कहना है कि उसके पति ने उसे गैरकानूनी तरीके से फोन पर 2007 में तीन तलाक दिया है। जिसके बाद उसके ससुराल वालो ने बेटी के साथ महिला को घर से बाहर निकाल दिया, जबकि महिला के दो बेटे अभी भी ससुराल वालों के साथ रह रहे हैं।

ट्रायल कोर्ट ने खारिज की याचिका

ट्रायल कोर्ट ने खारिज की याचिका

शबनम ने पहली बार ट्रायल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन महिला की याचिका को 2018 में खारिज कर दिया गया, जिसके बाद महिला ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वरिष्ठ वकील आरबी सिंघल नेऔर निलोफर खान ने बेंच से कहा कि ट्रायल कोर्ट ने महिला की घर पर अधिकार की याचिका को खारिज कर दिया, कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 2007 के फैसले का हवाला देते हुए याचिका को खारिज किया है। जिसके बाद वकील ने सुप्रीम कोर्ट से अपने फैसले पर फिर से विचार करने को कहा है।

कोर्ट का फैसला मूल भावना के खिलाफ

कोर्ट का फैसला मूल भावना के खिलाफ

सिंघल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हाई कोर्ट में इस बात को लेकर अलग-अलग विचार है। उन्होंने कहा कि 2007 का सुप्रीम कोर्ट का फैसला प्रोटेक्शन ऑफ वीमेन फ्रॉम डॉमेस्टिक वायलेंस एक्ट की भावना के खिलाफ है। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि घर से बाहर निकालने के बाद वह बहुत बदतर हालात में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है। महिला के माता-पिता भी नहीं हैं। जिसके बाद वह मजबूरन 2013 में कोर्ट जाने के लिए मजबूर हुई, ताकि उन्हें रहने के लिए जगह मिल सके।

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