UP निकाय चुनाव: सुप्रीम कोर्ट ने OBC आरक्षण को लेकर HC के फैसले पर लगाई रोक, मांगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने बिना ओबीसी आरक्षण निकाय चुनाव करवाने को कहा था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना ओबीसी आरक्षण के उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव करवाने के आदेश दिए थे। जिसको लेकर योगी सरकार सुप्रीम कोर्ट गई। वहां से उसे बड़ी राहत मिली है, जहां सर्वोच्च अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। अदालत ने राज्य पिछड़ा आयोग को स्थानीय निकायों में कोटा देने के लिए ओबीसी के राजनीतिक पिछड़ेपन पर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 31 मार्च तक का समय दिया है।
जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले के एक भाग पर रोक लगाई है। साथ ही सभी पक्षों को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है। पहले ये अनुमान लगाया जा रहा था कि जनवरी या फरवरी की शुरुआत में चुनाव हो जाएंगे, लेकिन अब मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने से ये संभव नहीं है। अदालत ने नया नोटिफिकेशन जारी करने का आदेश दिया है। इस मामले को लेकर विपक्षी दल लगातार योगी सरकार पर हमलावर थे।
सीएम योगी ने कही ये बात
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सीएम योगी ने ट्वीट कर लिखा कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा उत्तर प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव के संबंध में दिए गए आदेश का हम स्वागत करते हैं। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई समय सीमा के अंतर्गत ओबीसी आरक्षण लागू करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार निकाय चुनाव संपन्न कराने में सहयोग करेगी।
यूपी सरकार ने गठित की थी कमेटी
हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद योगी सरकार ने ओबीसी आरक्षण को लेकर पांच सदस्यीय आयोग का गठन किया था, जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत न्यायाधीश रामअवतार सिंह कर रहे। इस आयोग को अपनी रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 6 महीने का वक्त दिया गया है।
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ऐसे समझें पूरा मामला
दरअसल यूपी के 762 नगरीय निकायों में चुनाव होने थे, जिनका कार्यकाल दिसंबर से 19 जनवरी 2923 के बीच खत्म हो रहा। इसको लेकर योगी सरकार ने ओबीसी कोटे का ड्राफ्ट जारी कर दिया गया। बाद में ये मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा और वहां 93 याचिकाएं दायर हुईं। जिस पर एकसाथ सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि आरक्षण के ड्राफ्ट में सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूले का ध्यान नहीं रखा गया है। योगी सरकार ने भी अपनी दलीलें कोर्ट के सामने रखी थीं, लेकिन जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस सौरव लवानिया की खंडपीठ ने इसे खारिज कर दिया। साथ ही बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव करवाने का फैसला सुनाया। जिस पर सरकार को सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा।
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